जेन-जी की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप विश्वविद्यालयों को भी बदलना होगा : आचार्य बालकृष्ण
फरीदाबाद में मानव रचना शिक्षण संस्थान में उच्च शिक्षा और जेन-जी की बदलती अपेक्षाओं पर चर्चा की गई। शिक्षा जगत के वरिष्ठ व्यक्तियों ने युवाओं के लिए सही मार्गदर्शन और प्राइवेट विश्वविद्यालयों की भूमिका पर विचार साझा किए। इस दौरान एक पुस्तक का अनावरण भी हुआ, जिसमें भारतीय विश्वविद्यालयों के संस्थापकों की प्रेरणादायक कहानियां शामिल हैं।

फरीदाबाद, अभिषेक शर्मा। जेन-जी की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप विश्वविद्यालयों को बदलने और युवाओं को सही दिशा देने की जरूरत के साथ उच्च शिक्षा में पहुंच, गुणवत्ता, शोध और प्रासंगिकता पर मानव रचना शिक्षण संस्थान में चर्चा हुई। पतंजलि विश्वविद्यालय कुलाधिपति आचार्य बालकृष्ण सहित शिक्षा जगत के वरिष्ठ लोगों ने युवा पीढ़ी को सही सीख और मार्गदर्शन देने, बदलती जरूरतों के अनुरूप शिक्षा को तैयार करने और प्राइवेट विश्वविद्यालयों की बढ़ती भूमिका पर अपने विचार रखे। इस दौरान प्रो. भूषण पटवर्धन और डॉ. पंकज मित्तल द्वारा सह-लिखित पुस्तक फ्रॉम विजन टू रियलिटी, इंस्पायरिंग स्टोरीज ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटी फाउंडर्स के अनावरण के अवसर पर मानव रचना में आयोजित वाइस चांसलर्स कॉन्क्लेव में इन विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
आचार्य बालकृष्ण, प्रो. भूषण पटवर्धन और डॉ. पंकज मित्तल ने कहा कि जेन-जी को लेकर एक ही नजरिया नहीं रखा जा सकता। देश के युवा प्रतिभाओं से भरे हैं और उनमें अपार क्षमता है। जरूरत उन्हें सही दिशा और अवसर देने की है, ताकि उनकी प्रतिभा और ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण से जोड़ा जा सके। इस दौरान आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय शोधकर्ता प्रो. भूषण पटवर्धन, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज की महासचिव डॉ. पंकज मित्तल, मानव रचना शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत भल्ला, शारदा यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. पीके गुप्ता सहित देश के विश्वविद्यालयों ने प्रतिनिधियों ने अपने विचार सांझा किए।


