खेल केवल मनोरंजन नहीं, सीखने का भी सशक्त माध्यम
डुमरांव में 'खेलों और सीखों' थीम पर अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उद्देश्य बच्चों की शैक्षणिक प्रगति के साथ खेल गतिविधियों का महत्व बताना था। शिक्षकों ने अभिभावकों को बच्चों को खेलों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की। खेल केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि विकास का माध्यम है।

युवा के लिए ------- अपील सरकारी विद्यालयों में ‘खेलों और सीखों’ थीम पर हुई संगोष्ठी अभिभावकों के साथ बच्चों की शैक्षणिक प्रगति पर विचार किया डुमरांव, संवाद सूत्र। प्रखंड के अलग-अलग सरकारी विद्यालयों में शनिवार को ‘खेलों और सीखों’ थीम पर अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई के साथ उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास में खेल गतिविधियों की भूमिका को रेखांकित करना रहा। संगोष्ठी के दौरान शिक्षकों ने अभिभावकों के साथ बच्चों की शैक्षणिक प्रगति, उनकी रुचि और विद्यालय में होने वाली गतिविधियों को लेकर चर्चा की। इस दौरान मध्य विद्यालय रामपुर मठिया में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानाध्यापक अरुण कुमार ने बच्चों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं समझना चाहिए। खेल बच्चों के सीखने का एक प्रभावी माध्यम है। खेलों के जरिए बच्चे अनुशासन, सहयोग, नेतृत्व, निर्णय लेने और टीम भावना जैसे महत्वपूर्ण गुण सहज तरीके से सीखते हैं। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ खेलों में भागीदारी से बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है। कहा कि खेल गतिविधियां बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उनकी शारीरिक सक्रियता को भी बनाए रखती हैं। मैदान पर बच्चों को जीत-हार दोनों का सामना करना पड़ता है। इससे उनमें संघर्ष करने, असफलता से सीखने और दोबारा बेहतर प्रदर्शन करने की भावना विकसित होती है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को उनकी रुचि के अनुरूप खेलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों ने भी शिक्षकों के समक्ष बच्चों की पढ़ाई और अन्य गतिविधियों से जुड़े सवाल रखे। शिक्षकों ने अभिभावकों से नियमित रूप से विद्यालय से संपर्क बनाए रखने तथा बच्चों की दिनचर्या पर ध्यान देने की अपील की।
खेल से नेतृत्व व निर्णय लेने की क्षमता विकसित
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुधांशु कुमार ने बताया कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए पढ़ाई के साथ खेल गतिविधियों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। खेल बच्चों को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के साथ उनमें अनुशासन, सहयोग, नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करते हैं। खेलों और सीखों की थीम पर आयोजित अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी का उद्देश्य भी बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को खेलों से जोड़ना है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को पढ़ाई के साथ नियमित रूप से खेलकूद के लिए प्रेरित करें। विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर बच्चों की प्रतिभा को निखारने का प्रयास किया जा रहा है। (डुमरांव से अमरनाथ केशरी)


