मॉडल स्कूलों में लैब, स्मार्ट क्लास और नवाचार से निखरेगी शिक्षा की तस्वीर
लीड युवा पेज ::::::::::यो मांगा, स्मार्ट क्लास, खेलकूद, म्यूजिकल बैंड और नवाचार होंगे वीडियो का हिस्सा बच्चों की भागीदारी, शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच संवाद तथा कक्षा में पढ़ाने के नए तरीकों को...

हमारे, प्रतिनिधि। सुबह की प्रार्थना के बाद बच्चे सिर्फ किताब खोलकर बैठें, शिक्षक पढ़ाएं और घंटी बजते ही कक्षा खत्म।
नई कार्यप्रणाली
मॉडल स्कूलों में पढ़ाई का यह पारंपरिक तरीका अब बदलने की तैयारी है। सरकार चाहती है कि आदर्श विद्यालयों में पढ़ाई सिर्फ पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रयोगशाला, स्मार्ट क्लास, खेलकूद, तकनीक और नवाचार के जरिए बच्चों के सीखने का अनुभव भी बेहतर हो। इसी सोच के साथ शिक्षा विभाग सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालयों) पर अपनी नजरें केंद्रित की हैं। विभाग अब इन स्कूलों में हो रहे ऐसे कामों को तलाश रहा है, जिन्हें दूसरे विद्यालयों के लिए भी उदाहरण बनाया जा सके। इसके लिए सभी जिलों से स्कूलों के बेस्ट प्रैक्टिस का पांच से दस मिनट का वीडियो मांगा गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने डीईओ को पत्र जारी कर 14 सितंबर तक वीडियो उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसमें स्कूल की ऐसी गतिविधियां दिखानी हैं, जिनसे यह पता चले कि बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए विद्यालय किस तरह नए प्रयोग कर रहा है।
वीडियो सामग्री
चेतना सत्र से शुरू होगी तस्वीर वीडियो में विद्यालय के चेतना सत्र से लेकर कक्षा-कक्ष तक की गतिविधियां दिखाई जाएंगी। बच्चों की भागीदारी, शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच संवाद तथा कक्षा में पढ़ाने के नए तरीकों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। विभाग का जोर इस बात पर है कि वीडियो सिर्फ स्कूल की इमारत या सुविधाओं का प्रदर्शन न हो, बल्कि बच्चों की पढ़ाई में इन सुविधाओं का कितना इस्तेमाल हो रहा है, यह भी दिखाई दे। लैब में प्रयोग, स्मार्ट क्लास में पढ़ाई आईसीटी लैब और आईएसएम लैब का सदुपयोग, विज्ञान प्रयोगशाला में बच्चों का प्रयोग करना और ऑनलाइन या स्मार्ट क्लास के माध्यम से पढ़ाई भी बेस्ट प्रैक्टिस का हिस्सा होगी। यानि जिस स्कूल में तकनीक और प्रयोगशाला सिर्फ कमरे में बंद नहीं हैं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई का हिस्सा बन चुके हैं, उसके काम को सामने लाया जाएगा। इसके साथ म्यूजिकल बैंड, खेलकूद और विद्यार्थियों के लिए किए जा रहे नवाचार को भी वीडियो में जगह देने को कहा गया है। इससे स्कूलों में पढ़ाई के साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास पर दिए जा रहे जोर की तस्वीर सामने आएगी।
एक साझा प्रयास
एक स्कूल का प्रयोग दूसरे में भी होगा लागू दरअसल, विभाग की कोशिश सिर्फ अच्छे स्कूलों की पहचान करने तक सीमित नहीं है। किसी विद्यालय में यदि पढ़ाई का कोई तरीका प्रभावी साबित हो रहा है तो उसे दूसरे मॉडल स्कूलों में भी अपनाया जा सकता है। इससे एक स्कूल के सफल प्रयोग का लाभ दूसरे स्कूलों के बच्चों को भी मिल सकेगा। 18 सितंबर को सरस्वती विद्या निकेतनों के प्रधानाध्यापकों की कार्यशाला प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस कार्यशाला में इन बेस्ट प्रैक्टिस को साझा कर मॉडल स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का एक समान बेहतर मॉडल तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। रिपोर्टर:प्रवीण कुमार


