बंदी अपनी पहचान हथकड़ी से नहीं, बल्कि हुनर से बनाएं : डीसी
चाईबासा में उपायुक्त मनीष कुमार ने मंडल कारा में घरेलू पौधों की खेती पर 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए। उन्होंने बंदियों को आत्मनिर्भरता, कौशल विकास और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। इस पहल का उद्देश्य बंदियों को कौशल के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है।

चाईबासा, संवाददाता। उपायुक्त मनीष कुमार ने रविवार को चाईबासा स्थित मंडल कारा में प्रोजेक्ट परिवर्तन के तहत आयोजित औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती संबंधी 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में शामिल होकर प्रशिक्षित बंदियों को प्रमाण-पत्र वितरित किया। इस अवसर पर बन्दियों का उत्साहवर्द्धन करते हुए उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट परिवर्तन का उद्देश्य बंदियों के कौशल विकास के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाना तथा समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। बंदी अपनी पहचान हथकड़ी से नहीं, बल्कि अपने हुनर व कौशल से बनाएं। उन्होंने कहा कि कारा से बाहर निकलने के बाद बंदी इस प्रशिक्षण का उपयोग कर सम्मानजनक आजीविका अर्जित कर सकते हैं तथा समाज में अपनी सकारात्मक पहचान स्थापित कर सकते हैं।
यह प्रशिक्षण आपके लिए स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने बंदियों को अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने, कौशल आधारित रोजगार अपनाने तथा समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। उपायुक्त ने यह भी कहा कि मंडल कारा में बंदियों को प्रतिदिन समाचार पत्र उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे नियमित रूप से समाचारों का अध्ययन कर अपने ज्ञान, जागरूकता एवं समसामयिक विषयों की जानकारी बढ़ा सकें। उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन आरसेटी के माध्यम से 02 जुलाई से 11 जुलाई तक किया गया। प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती, उनकी वैज्ञानिक पद्धति, उत्पादन, संरक्षण, विपणन एवं स्वरोजगार से जुड़े विभिन्न तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी गई।कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपायुक्त द्वारा प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले सभी प्रतिभागी बंदियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनने और समाज की मुख्यधारा में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। मंडलकारा के पदाधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा स्वैच्छिक रक्तदान किया गया था, उसके निमित्त भी सभी को उपायुक्त के द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया।


