मक्का में कीट प्रबंधन के लिए किसानों को दिया प्रशिक्षण
कृषि विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और कीट प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जाफरपट्टी में आयोजित किसान पाठशाला में प्रमुख कीटों की पहचान, प्रकोप की निगरानी और प्रबंधन के उपायों की जानकारी दी गई। 14 सप्ताह तक चलने वाले इस कार्यक्रम में किसानों को वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी मिलेगी।

किसानों को आधुनिक व वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने व फसलों में कीट व्याधियों के प्रभावी बनाने के साथ पर्यावरण अनुकूल खेती के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शनिवार को राजापाकर प्रखंड के जाफरपट्टी में खरीफ 2026-27 के लिए आयोजित किसान पाठशाला अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी
प्रखंड कृषि पदाधिकारी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए किसानों को श्रीअन्न मक्का फसल में लगने वाले प्रमुख कीट व्याधियों की पहचान,उनके जीवन चक्र,प्रकोप एवं फसल होने वाले नुकसान व बचाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम में विशेष रूप से फॉल आर्मीवर्म की पहचान, उसके प्रकोप की निगरानी तथा आर्थिक क्षति व उचित प्रबंधन उपाय अपनाने पर जोर दिया गया। किसानों को बताया गया कि कीट प्रकोप की नियमित निगरानी करते हुए आवश्यकता के अनुरुप कीटनाशकों को प्रयोग करने की जानकारी दी गई,ताकि अनावश्यक लागत के साथ पर्यावरण एवं मित्र कीटों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सके।
समेकित कीट प्रबंधन की प्रक्रिया
इस प्रशिक्षण के दौरान समेकित कीट प्रबंधन की विभिन्न विविधों के बारे में व्यवहारिक जानकारी दी गई। इसमें गर्मी के मौसम में गहरी जुताई,समय पर बुआई,फसल चक्र, खेत की नियमित निगरानी, फेरोमोन ट्रेन,पीला एवं नीला चिपचिता ट्रैप तथा लाइट ट्रैप के उपयोग के साथ साथ मित्र कीटों की पहचान, जैविक नियंत्रण, वानस्पतिक कीटनाशकों के महत्व और उपयोग की जानकारी दी गई। यह किसान खेत पाठशाला 14 सप्ताह तक संचालित की जाएगी,जिसके माध्यम से किसानों को विभिन्न फसलों में लगने वाले कीट व्याधियों की पहचान तथा उनके वैज्ञानिक एवं समेकित प्रबंधन की व्यवहारिक जानकारी दी जाएगी। -जयप्रकाश


