साइलेंट अटैक ने बुझाई परिवार की उम्मीदों की दीपमाला
17 वर्षीय दीपमाला, जो पढ़ाई में बहुत होशियार थी, ने साइलेंट अटैक के कारण अपनी जान खो दी। उसके परिवार का मानना था कि वह इंजीनियर बनेगी और देश के लिए कुछ करेगी। दीपमाला की मौत ने सभी को हिला कर रख दिया और परिजन ने बिना पोस्टमार्टम शव ले जाने का फैसला किया।

17 वर्षीय दीपमाला। अपने परिवार की बड़ी बेटी होने के कारण सबकी लाड़ली थी। इसकी वजह भी थी कि उसका ज्यादा वक्त पढ़ाई में ही गुजरता था। कुछ कर गुजरने की दीपमाला की तमन्ना का प्रमाण उसके कमरे से मिलता है, जिसमें प्रवेश करते ही नजर आती है सफल होने वाले पुरुषों की तस्वीरें, जिन्हें देख दीपमाला हर रोज इंजीनियर बनने के बाद देश के लिए कुछ कर गुजरने के दीप जलाया करती थी तो परिजन बेटी को हर वक्त पढ़ाई में देख कई उम्मीदें पाले हुए थे, लेकिन शुक्रवार को पड़े साइलेंट अटैक के साथ दीपमाला की आंखें बंद हुई तो बेटी की मौत से परिजनों के आंसू भी थमने का नाम नहीं ले रहे थे। बसई मोहम्मदपुर के शंकरपुर में रहने वाली दीपमाला अपने पिता संजय कुमार को अपनी प्रेरणा मानती थी। संजय कुमार गढ़िया चकरपुर में शिक्षक हैं तो ग्रामीण क्षेत्र से आने के बाद भी दीपमाला में कुछ कर गुजरने की तमन्ना थी। हर रोज सुबह होते ही गांव से कई किमी दूर फिरोजाबाद वह कोचिंग सेंटर में पढ़ने के लिए आती थी। इसके बाद में उसका अधिकांश वक्त घर में भी पढ़ने में गुजरता था। एकाएक दीपमाला की मौत की खबर मिलने पर परिजन भी अवाक रह गए। पहले तो उन्हें अपने कानों पर भरोसा ही नहीं हुआ, जब सच सामने आया तो चीख-पुकार मच गई。
दीपमाला के ताऊ हरिओम बताते हैं
हां कि वह पढ़ने में बहुत होशियार थी। हाईस्कूल में 85 फीसद अंक लाने वाली दीपमाला पढ़ लिख कर इंजीनियर बनने के बाद कुछ करना चाहती थी। उसके पढ़ाई के कमरे में उन महापुरुषों की तस्वीरें लगी हुई हैं, जिन्होंने संघर्षों के बाद में सफलता हासिल की। वह इन तस्वीरों को देखकर ही प्रेरणा पाती थी तथा इनकी तरह कुछ करना चाहती थी। साइलेंट अटैक से दीपमाला की आंखे बंद हुई तो उसकी आंखों में पला सपना भी बंद आंखों में कैद होकर रह गया। दीपमाला की मौत से आहत परिजनों ने चौकी पर भी कोई सूचना नहीं दी एवं बगैर पोस्टमार्टम कराए शव को अपने साथ ले गए।
सहेली एवं राहगीर कुछ न समझ सके थे
दीपमाला के सड़क पर गिरने के बाद में उसके साथ चल रही उसकी सहेली सारा कुछ समझ नहीं पाई। उसने उसे आवाज लगाई, लेकिन जवाब नहीं मिला। इस दौरान राहगीरों की भीड़ जमा हो गई। पहले तो लोगों ने सोचा कि शायद मौसम में बदलाव या गर्मी की वजह से यह स्थिति बनी हो, लेकिन जब काफी पुकारने एवं हिलाने पर भी उसने आवाज नहीं दी तो स्टाफ के पहुंचने पर वह उसे लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे थे।
पहले भी बच्चों के लिए जानलेवा बना है साइलेंट अटैक
-प्राइवेट स्कूलों में जा चुकी है बच्चों की जान
-दोपहर के वक्त ही अक्सर हुई हैं घटनाएं
फिरोजाबाद, हिन्दुस्तान संवाद। साइलेंट अटैक जानलेवा बन रहा है। स्कूल में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चे इसका शिकार बन रहे हैं। फिरोजाबाद में पहले भी इस तरह के मामले प्रकाश में आ चुके हैं। देखने में आया है कि पूर्व में प्रकाश में आने वाले मामले भी स्कूलों में मध्यावकाश में ही घटे हैं।
पूर्व में कोटला रोड स्थित एक स्कूल में भी एक छात्र की स्कूल में उस वक्त मौत हो गई थी
जब वह मध्यावकाश में खाना खाने के बाद स्कूल में खेल रहा था। एकाएक बच्चा जमीन पर गिरा तथा स्कूल के शिक्षकों ने उसे उठाने का प्रयास किया, लेकिन नहीं उठा। बच्चे को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया था। उस वक्त घटने वाली यह घटना सीसीटीवी में कैद हुई। वहीं हिमायूंपुर में भी एक मासूम की मौत स्कूल में उस वक्त हुई थी, जब वह मध्यावकाश में टॉयलेट करने गया था। वह वहीं पर गिर पड़ा। जानकारी होने पर शिक्षक उसे बाहर लाए तथा बच्चे की तबियत यूं ही खराब समझ कर काफी देर तक उसे उठाने का प्रयास किया, लेकिन इसके बाद भी वह नहीं उठा। यह दोनों घटनाएं सीसीटीवी में कैद हो गई।
समान नाम राशि तो मौत का वक्त भी लगभग समान
ट्रॉमा सेंटर में दीपक एवं दीपमाला को लेकर परिजन एवं शिक्षक करीब-करीब एक साथ ही पहुंचे। इनकी मौत की खबर सुनकर अन्य लोग भी हैरान रह गए। वहीं इनके नामों को लेकर भी लोगों में चर्चा थी। दोनों की नाम राशि ही एक नहीं थी, बल्कि नाम भी करीब-करीब मिलते-जुलते थे। कक्षा सात के छात्र का नाम दीपक था तो कक्षा 11 की छात्रा का नाम दीपमाला। वहीं मौत की वजह भी लगभग समान बताई जा रही है तो जिस वक्त यह घटना हुई, उसमें भी ज्यादा अंतर नहीं था।


