देश की सेवा में शहीद हुए मुंडाली के लाल जनेश्वर का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, रछौती गांव में शोक
मेरठ/मुंडाली के रछौती गांव में जवान जनेश्वर प्रजापति (34 वर्ष) के शहीद होने की खबर से शोक की लहर दौड़ गई। हिमाचल प्रदेश में सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद जनेश्वर का निधन हो गया। शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, जिससे गमगीन माहौल बना।
मेरठ/मुंडाली भारतीय सेना के जांबाज जवान जनेश्वर प्रजापति (34 वर्ष) के शहीद होने की खबर से रछौती गांव और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। हिमाचल प्रदेश के शिमला में सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए जनेश्वर ने बुधवार को उपचार के दौरान अंतिम सांस ली। शुक्रवार सुबह सेना के वाहन से पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। शव के गांव में पहुंचते ही शोक व्याप्त हो गया।
जवान का परिचय
मुंडाली थाना क्षेत्र के रछौती गांव निवासी जनेश्वर प्रजापति, कुमाऊं रेजिमेंट की 11वीं बटालियन में तैनात थे। करीब 12 साल पहले वे देश सेवा के लिए सेना में भर्ती हुए थे। परिजनों के अनुसार, करीब 15 दिन पूर्व शिमला में गश्त के दौरान सेना की गाड़ी अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई थी, जिसमें जनेश्वर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें उपचार के लिए शिमला के सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां बुधवार को उनका निधन हो गया।
गांव में सन्नाटा
गांव में छाया सन्नाटा
शहीद जवान का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह लगभग 10:30 बजे सेना के काफिले के साथ जैसे ही उनके पैतृक गांव रछौती पहुंचा, परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। शव के घर पहुंचते ही बूढ़ी मां कृष्णा देवी, पत्नी नीतू और उनके तीन बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। जवान का चेहरा देखते ही परिजन और ग्रामीण खुद को रोक नहीं पाए और हर आंख नम दिखाई दी।
नम आंखों से विदाई
जनेश्वर की शहादत की खबर मिलते ही गांव और आसपास के क्षेत्रों से भारी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। सेना के जवानों ने पूरी गरिमा और सैन्य सम्मान (गार्ड ऑफ ऑनर) के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी। पूरा गांव गमगीन था और लोगों ने 'जनेश्वर अमर रहें' के नारे लगाए। इस दुखद घड़ी में पूरा गांव शहीद परिवार के साथ खड़ा नजर आया। क्षेत्र के गणमान्य लोगों और ग्रामीणों ने जनेश्वर की शहादत को नमन करते हुए उनके साहस और देश सेवा के जज्बे को याद किया।


