पत्नी थी विलेन, बेटियों का क्या होगा सोचकर सब कुछ खत्म कर दिया
राजा अंसारी, पत्नी और बेटी का हत्यारा, अवसादग्रस्त है। उसने पत्नी को विलेन बताया और आर्थिक तंगी का हवाला दिया। राजा ने चार महीने से दवा लेना बंद कर दिया था और मानसिक स्वास्थ्य से जूझता रहा। पुलिस मामले की जांच कर रही है और जल्द चार्जशीट दाखिल करने की योजना बना रही है।

ट्रांस हिंडन, आयुष गंगवार। पत्नी व बेटी का हत्यारोपी राजा अंसारी अवसादग्रस्त है। पुलिस को दिए बयानों में उसने पत्नी को विलेन बताया। दवा खाने से लेकर हर छोटी बड़ी बात पर झगड़ा होना और अक्सर रुपये मांगने को लेकर उसने पत्नी पर आरोप लगाए। आरोपी ने कहा कि सिर्फ पत्नी को मारता और जेल चला जाता तो बेटियों का क्या होता। इसीलिए सब कुछ खत्म करने की साजिश रची। राजा अंसारी ने बताया कि करीब चार साल से वह अवसाद में है और पहले दिल्ली के एक क्लीनिक से दवा लेता था। कुछ समय से दिल्ली के ही इहबास से इलाज चल रहा था। कई बार अस्पताल की डिस्पेंसरी से ऑनलाइन ऑर्डर करके भी दवाएं मंगाता था। मगर चार माह से उसने दवा खाना बंद कर दिया था। पत्नी बेबी उसे दवा खाने के लिए टोकती थी। इस बात को लेकर भी दोनों के बीच पिछले चार महीनों से लगभग रोज ही विवाद होता था.
आर्थिक तंगी को भी बताया वजह
राजा ने बताया कि वह साल 2005 में गांव छोड़कर आया था। इतने लंबे समय में भी वह कुछ खास नहीं जोड़ पाया। ससुर ने रहने के लिए घर तो दे दिया था, लेकिन नौकरी से घर का खर्च नहीं चल पा रहा था। दोनों बेटियां दिल्ली के सरकारी स्कूल में पढ़ती थीं, बावजूद इसके पत्नी और बेटियों का खर्चा वह वहन नहीं कर पा रहा था। पत्नी की रोज की झिक-झिक और खर्च के बढ़ते दबाव से छुटकारा चाहता था।
10 दिन पहले भाई से हुई थी बात
ममूरा में रहने वाले बेबी के ममेरे भाई इस्लामुद्दीन ने बताया कि 10 दिन पहले ही फोन पर बहन से बात हुई थी। उसकी बात से ऐसा नहीं लगा कि यह सब हो जाएगा। इतना जरूर कहा था कि राजा दवाई नहीं लेता है और इसको लेकर झगड़ा करता है। उन्होंने बताया कि दोनों की लगभग 18 साल पहले शादी हुई थी। वह असम के सोनितपुर के रहने वाले हैं।
पड़ोस में कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं
राजा अंसारी के आसपास रहने वाले परिवारों के अधिकांश लोगों ने हत्याकांड को लेकर चुप्पी साध रखी है। मकान के बाहर पूरे दिन भीड़ लगी रही। लोग आपस में ही बात कर रहे थे, लेकिन स्पष्ट रूप से बोलने से बचते रहे। मौके पर पुलिस बल भी तैनात रहा। पुलिस और फॉरेंसिक जांच के बाद फ्लैट को सील कर दिया गया है।
दवाइयां न लेने से बढ़ गया अवसाद
मनोवैज्ञानिक डॉ. संजीव त्यागी ने इस हत्याकांड को लेकर कहा कि चार माह से दवा न लेने से अवसाद और बढ़ गया। राजा के लक्षणों से वह मैनिक डिसऑर्डर से ग्रसित लग रहा है। ऐसे लोगों की अपनी आभासी दुनिया होती है। कोई समझाने का प्रयास करे, विरोध करे, उनकी बात पर इंकार करे तो वह दुश्मन से कम नहीं होता। इनके सामने अपनी बात रखना भी बहुत मुश्किल होता है। बेटियों को मारना उसकी अपनी नजर में कोई गलत काम नहीं था, बल्कि उसने तो ये सोचा था कि ऐसा करने से सब कुछ खत्म हो जाएगा और जेल जाने पर उसे कोई चिंता नहीं रहेगी। रोज की समस्याओं से मुक्ति मिल जाएगी।
सीडीआर निकाली जाएगी
पुलिस को फ्लैट कोई डायरी या दस्तावेज नहीं मिला है, जिस पर राजा ने अपने बारे में कुछ लिखा है। 10वीं पास राजा आसपास के लोगों से ज्यादा बात नहीं करता था। पुलिस भी उसे अवसादग्रस्त मान रही है। हालांकि कुछ और एंगल पर भी जांच की जा रही है। राजा और बेबी के फोन नंबर की सीडीआर निकलवाई जाएगी ताकि दोनों के किसी अन्य से संबंध के बारे में कुछ स्पष्ट हो सके। हालांकि जोया और आरोपी से पूछताछ में यह बात सामने नहीं आई। मगर पड़ोस के एक व्यक्ति का कहना था कि बेबी के एक जानकार लेकर दोनों में झगड़ा होता था।
पुलिस जल्द चार्जशीट दाखिल करेगी
हत्याकांड में पुलिस को लगभग सभी साक्ष्य मौके से ही मिल गए। आरोपी के अलावा उसकी बेटी के सबसे पहले घर में घुसे पड़ोसियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। मोबाइल की सीडीआर और फॉरेंसिक रिपोर्ट जल्द से जल्द मंगाकर पुलिस एक सप्ताह में चार्जशीट दाखिल कर सकती है। इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में भी चलाया जा सकता है ताकि आरोपी को जल्द से जल्द सजा हो सके।


