कृषि विकास योजना से किसानों की आय होगी दोगुनी
मधुबनी जिले में रासायनिक खाद के अधिक इस्तेमाल से बंजर हो रही धरती को उपजाऊ बनाने के लिए कृषि विभाग ने परम्परागत कृषि विकास योजना लागू की है। इस योजना के तहत किसानों को आर्थिक सहायता और जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

मधुबनी, नगर संवाददाता। रासायनिक खाद के अधिक इस्तेमाल से बंजर हो रही जिले की धरती को फिर से उपजाऊ बनाने के लिए परम्परागत कृषि विकास योजना वरदान बनकर आई है। कृषि विभाग ने इस योजना को जिले के हर प्रखंड में लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। ताकि मिथिला की पहचान पान, मखाना, धान और सब्जी की खेती को जैविक ब्रांड मिल सके। जिला कृषि पदाधिकारी के अनुसार केंद्र सरकार की यह योजना वर्ष 2015 में शुरू की गई थी। लेकिन मधुबनी में अब इसे बड़े पैमाने पर विस्तार दिया जा रहा है। योजना के तहत गांवों में 20 हेक्टेयर का एक क्लस्टर बनाया जाएगा। एक क्लस्टर में कम से कम 50 किसान होंगे। जिले के बेनीपट्टी, बाबूबरही, मधेपुर, हरलाखी, जयनगर, बासोपट्टी जैसे प्रखंडों में जहां जैविक खेती की परम्परा रही है, वहां पहले चरण में क्लस्टर बनाने का लक्ष्य है।
क्या मिलेगा किसानों को:
इस योजना में किसान को तीन साल तक प्रति हेक्टेयर 31,500 रुपये की सहायता मिलेगी। इसमें 15,000 रुपये सीधे किसान के खाते में डीबीटी के माध्यम से जैविक खाद, गौमूत्र, जीवामृत, वर्मी कम्पोस्ट और बीज खरीदने के लिए आएंगे। 9,000 रुपये प्रशिक्षण के लिए, 4,500 रुपये पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराने के लिए व 3,000 रुपये जैविक प्रमाणीकरण के लिए सरकार देगी। किसान जैविक खेती पोर्टल पर पंजीकृत होकर अपना उत्पाद सीधे बड़े बाजारों में बेच सकेंगे। जिले के लिए यह योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां की मखाना और पान की मांग विदेशों तक है। लेकिन रासायनिक अवशेष के कारण निर्यात में दिक्कत आती है। जैविक प्रमाणीकरण मिलने के बाद यहां के मखाना को दोगुना दाम मिलेगा और मिथिला पान को नया बाजार मिलेगा।
मिट्टी होगी स्वस्थ, खर्च कम:
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जिले की मिट्टी में कार्बनिक तत्व घटकर 0.5 प्रतिशत से नीचे चला गया है। जैविक खेती से यह फिर से 1 प्रतिशत तक पहुंचेगा। इससे सिंचाई की जरूरत कम होगी और लागत 30 प्रतिशत तक घटेगी। योजना में 65 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसानों व 30 प्रतिशत महिला किसानों की भागीदारी अनिवार्य है। इच्छुक किसान अपने पंचायत के कृषि समन्वयक या प्रखंड कृषि कार्यालय में समूह बनाकर आवेदन कर सकते हैं। विभाग ने इस माह के अंत तक 100 नए क्लस्टर बनाने का लक्ष्य रखा है।


