Trade Between India China Relations LAC Border Tension - LAC पर तनाव को भारत-चीन रिश्तों में रोड़ा बनने से रोक रहा व्यापार DA Image
16 दिसंबर, 2019|1:16|IST

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LAC पर तनाव को भारत-चीन रिश्तों में रोड़ा बनने से रोक रहा व्यापार

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भारत-चीन सीमा संबंधी मुद्दों पर नरम-गरम रिश्तों के बीच आपसी व्यापार को मजबूती देने के लिए तैयार हैं। दोनों देशों के बीच सीमा संबंधी विवाद के निपटारे को लेकर बनाए गए तंत्र की लंबित बैठक जल्द होने की उम्मीद है। लेकिन व्यापार पर दोनों देशों की प्राथमिकताओं को सीमा संबंधी मुद्दों से ऊपर रखने की कोशिश की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों ने पिछले कुछ समय में कई बार तनावपूर्ण मौकों पर भी शीर्ष नेतृत्व के बीच बनी समझ के चलते आपसी मामलों को परिपक्वता से निपटाया है। इसमें व्यापार संबंधी जरूरतों से बने रिश्तों ने अहम भूमिका निभाई है। सूत्रों ने कहा सीमा संबंधी वार्ता के साथ ही दोनों देश व्यापार को लेकर असहमति के बिंदुओं को कम करने पर जल्द चर्चा करेंगे।

चीन और भारत परस्पर आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रहे : सूत्रों ने कहा कि दोनों देश चीन और भारत अपने हितों की रक्षा करते हुए परस्पर आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। आरसेप में चीनी प्रभाव की आशंका के मद्देनजर भारत  ने समझौते पर दस्तखत नहीं किया।

सूत्रों ने कहा कि दुनिया भर में व्यापार को लेकर छिड़ी जंग के बीच चीन व्यापार के मुद्दे पर भारत का साथ चाहता है। भारत चाहता है कि चीन वास्तविक निवेश पर जोर दे। वहीं दोनों देशों के बीच में तमाम उतार चढ़ाव के बावजूद कारोबार पिछले साल 99.54 अरब डॉलर की ऊंचाई तक पहुंच गया था। इस साल इसे 100 अरब डॉलर पार करने की मंशा जताई गई है।

चीन के रुख के चलते कुछ अड़चनें नजर आ रही थीं
सूत्रों ने कहा कि डोकाला के बाद हाल में कश्मीर मुद्दे पर चीन के रुख के चलते कुछ अड़चनें नजर आ रही थीं। चीन ने अनुच्छेद 370 समाप्त करने के फैसले के बाद जिस तरह से पाकिस्तान का साथ दिया और बयानबाजी की भारत ने भी उसका जवाब माकूल तरीके से दिया। लेकिन वुहान में बनी भावना का ही परिणाम है कि दोनों देशों ने अपनी कूटनीतिक सीमाओं का ख्याल रखते हुए बात आगे नहीं बढ़ने दिया और व्यापार पर ध्यान बना रहा। जानकारों का मानना है कि व्यापार बड़ा जरिया है जिसने रिश्तों में संतुलन बनाए रखने में मदद की है।

चीनी राष्ट्रपति की भारत यात्रा सफल रही थी
सूत्रों ने कहा कि चीन के राष्ट्रपति अनुच्छेद 370 समाप्त करने के फैसले के बाद असहमति के पक्षों को किनारे रखते हुए भारत आए। महाबलीपुरम की उनकी यात्रा वुहान की तर्ज पर ही कूटनीतिक रिश्तों को मजबूत बनाने में सफल रही। महाबलीपुरम की सफलता के बाद ही चीनी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स बैठक के दौरान वर्ष 2020 के अनौपचारिक मुलाकात के लिए पीएम मोदी को चीन आने का निमंत्रण दिया है। 

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