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कोयलामुक्त ऊर्जा की राह आसान नहीं : रिपोर्ट  

हरित ऊर्जा की तरफ कदम बढ़ाना देश की जरूरत है। लेकिन इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सरकार के समक्ष चुनौतियां भी कम नहीं हैं। सरकार को कोयलामुक्त ऊर्जा का लक्ष्य हासिल करने के लिए सामाजिक, राजनीतिक और...

कोयलामुक्त ऊर्जा की राह आसान नहीं : रिपोर्ट  
नई दिल्ली, मदन जैड़ाThu, 06 Sep 2018 06:39 AM
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हरित ऊर्जा की तरफ कदम बढ़ाना देश की जरूरत है। लेकिन इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सरकार के समक्ष चुनौतियां भी कम नहीं हैं। सरकार को कोयलामुक्त ऊर्जा का लक्ष्य हासिल करने के लिए सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है। आईआईएम अहमदाबाद के विशेषज्ञों की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोयले से इतर वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत पर निर्भरता बढ़ाने से करीब डेढ़ करोड़ लोगों के समक्ष रोजगार का प्रश्न पैदा हो सकता है। सरकार को इसका विकल्प तलाश करना होगा वरना उसे कई सामाजिक और राजनीतिक संकटों का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं कोयला खनन बंद होने से खरबों डालर का निवेश बेकार चला जाएगा।  

व्यर्थ जाने वाली संपत्तियां भी बढ़ेंगी 

रिपोर्ट के अनुसार ऊर्जा तंत्र के रूपान्ततरण के लिए वर्ष 2030 तक कुल 6 खरब डॉलर के निवेश की जरूरत पड़ेगी। यह निवेश विद्युत, परिवहन, निर्माण तथा कृषि क्षेत्रों में करना होगा। रिपोर्ट के अनुसार कोयले के अन्य विकल्पों पर अमल करने से एक तरफ प्रदूषण में भारी कमी आएगी लेकिन दूसरी तरफ इसके वित्तीय दुष्प्रभाव भी कम नहीं हैं। इससे व्यर्थ जाने वाली संपत्तियां भी बढ़ेंगी। क्योंकि तब कोयला बिजली संयंत्रों को वक्त से पहले ही बंद करना पड़ेगा। जब बिजलीघर नहीं होंगे तो कोयले का खनन भी रुक जाएगा। उस स्थिति में भारतीय खदानों में करीब 22 अरब टन कोयला अनुपयोगी रह जाएगा, जिसका अनुमानित मूल्य करीब 6.7 खरब डॉलर होगा। इतना ही नहीं उन वित्तीय संस्थानों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है जिन्होंने 2006-2014 के दौरान कोयला आधारित बिजलीघरों को कर्ज दे रखा है। 

कोयला बिजलीघरों से 70 फीसदी बिजली की जरूरत पूरी होती है 

बता दें कि देश में अभी कुल ऊर्जा की जरूरत का 70 फीसदी कोयला बिजलीघरों से पूरा होता है। सरकार ने इसे 2030 तक घटाकर 40 फीसदी लाने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही सरकार ने इस अवधि तक करीब 200 गीगावॉट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। 

रोजगार की समस्या आएगी

रिपोर्ट में कहा गया कि कोयला निकालने से लेकर कोयला बिजलीघरों और इससे जुड़े कार्य से देश में करीब डेढ़ करोड़ लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े हैं। कोयले का उपयोग बंद होने से इन लोगों के समक्ष रोजगार की समस्या आएगी। दरअसल, कोयला खदानें प्रत्यक्ष रूप से सात लाख श्रमिकों और अप्रत्यक्ष रूप से 50 लाख लोगों को रोजगार उपलब्धब कराती हैं।

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