अपडेट : टीएसमी ने पार्टी संगठन पर विरोधी गुट के दावे को खारिज किया
चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के गुट के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। टीएमसी का कहना है कि उनके संविधान में संगठनात्मक चुनाव हर पांच साल में होने की बात कही गई है। ऋतब्रत ने भी आयोग के सामने अपने दावे प्रस्तुत किए।

नोट : टीएमसी वाली खबर अपडेट है। - ममता की ओर से पांच नेताओं का दल पहुंचा
- चुनाव आयोग के सामने पेश हुए टीएमसी के दोनों पक्ष
नई दिल्ली, एजेंसी। चुनाव आयोग ने शनिवार को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के प्रतिनिधियों के साथ दिल्ली में अलग-अलग बैठक की। इस दौरान दोनों पक्षों ने आयोग के सामने अपने दावे रखे।
टीएमसी का दावा
ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस ने अपनी पार्टी के संविधान के उस नियम का हवाला दिया, जिसमें पार्टी की संगठनात्मक कमेटियों और पदाधिकारियों का कार्यकाल पांच साल तय किया गया है। पार्टी ने विरोधी गुट के उस दावे को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि मौजूदा संगठनात्मक ढांचा 2025 में अमान्य हो गया था। पार्टी सूत्रों ने चुनाव आयोग (ईसी) के पास मौजूद पार्टी संविधान के 2010 वाले वर्जन की ओर इशारा किया, जिसके नियम 9(ए) में कहा गया है। हर तृणमूल कांग्रेस कमेटी और उसके पदाधिकारियों, कार्यकारी कमेटी और सदस्यों का कार्यकाल आम तौर पर पांच साल का होगा। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की गई पीडीएफ के अनुसार, संविधान की कॉपी जून 2010 में छापी गई थी। सूत्रों ने कहा, टीएमसी का संविधान बिल्कुल साफ है। संगठनात्मक चुनाव हर पांच साल में होने हैं। लगभग दो दशकों से पांच साल में ऐसा ही हो रहा है।
बैठक का उद्देश्य
आयोग के साथ यह बैठक पार्टी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और संगठनात्मक चुनावों को लेकर दोनों गुटों के दावों के बीच हुई। इस दौरान ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले पक्ष ने आयोग के सामने कहा, पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को लेकर कोई विवाद नहीं है। पार्टी के नेताओं ने विरोधी गुट के दावे के आधार पर सवाल उठाए। प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को बताया कि विरोधी के दावे का समर्थन करने वाले विधायकों ने पांच महीने पहले टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। ममता ने उस पार्टी चिह्न पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत उन्होंने चुनाव लड़ा था। उन्होंने बताया कि इन विधायकों को चुनाव लड़ने के लिए टीएमसी ने अपने खाते से 25-25 लाख रुपये दिए थे। आयोग के सामने पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में डेरेक ओब्रायन, कल्याण बनर्जी, सागरिका घोष, साकेत गोखले और वकील अभिनव सिंह शामिल थे।
ऋतब्रत का पक्ष
पश्चिम बंगाल में विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला पक्ष भी आयोग के सामने पेश हुआ और पक्ष रखा। बनर्जी ने बताया कि बैठक के दौरान दस्तावेज के साथ आयोग के सवालों के जवाब दिए गए। आयोग ने उनसे शनिवार तक अतिरिक्त दस्तावेज मांगें हैं, इन्हें सौंपा जाएगा। बनर्जी ने भरोसा जताया कि उन्हें ही टीएमसी का चुनाव चिह्न मिलेगा।


