चलते-चलते-- डायनासोर के अनोखे अंडों ने खोले राज
हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
अर्जेंटीना में मिले प्राचीन डायनासोर टाइटनोसॉर के अंडों के छिलके से पता चला है कि ये केवल गर्म इलाकों में नहीं, बल्कि ठंडे क्षेत्रों में भी प्रजनन करते थे। ये अंडे लगभग 6.8 करोड़ साल पुराने हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि टाइटनोसॉर अपने अंडों को गर्म रखने के लिए शरीर पर नहीं बैठते थे।

ब्यूनस आयर्स, एजेंसी। धरती पर रहने वाले सबसे बड़े डायनासोरों में शामिल टाइटनोसॉर सिर्फ गर्म इलाकों में ही अंडे नहीं देते थे, बल्कि वे पृथ्वी के दक्षिणी हिस्सों में मौजूद काफी ठंडे क्षेत्रों में भी प्रजनन करते थे। अर्जेंटीना में मिले करीब 6.8 करोड़ साल पुराने डायनासोर के अंडों के छिलकों के अध्ययन से यह जानकारी हासिल हुई। अब तक इनके अंडे या उसके छिलके भूमध्य रेखा के आसपास के गर्म इलाकों में मिले थे। टाइटनोसॉर लंबे गर्दन वाले थे। इनका वजन 75 टन तक था। वैज्ञानिकों का मानना है कि टाइटनोसॉर अपने अंडों पर बैठकर उन्हें गर्म नहीं करते थे।
उनका शरीर इतना विशाल था कि अगर वे अंडों पर बैठते तो ये टूट सकते थे। संभव है कि वे मिट्टी और सूखी वनस्पतियों का बड़ा टीला बनाकर उसमें अंडे दबाते थे।


