गहने बिके, बेरहमी से पिटे...फिरौती मिलने पर साइबर गिरोह ने छोड़ा, अब वतन वापसी के पैसे नहीं
कुशीनगर, मिथिलेश द्विवेदी। बेहतर नौकरी और एक हजार डॉलर प्रतिमाह वेतन

कुशीनगर, मिथिलेश द्विवेदी। बेहतर नौकरी और एक हजार डॉलर प्रतिमाह वेतन का सपना लेकर म्यांमार पहुंचे कुशीनगर के दो युवकों और बिहार निवासी उनके साथी की तीन महीने की लंबी कैद आखिरकार खत्म हो गई। लेकिन, यह रिहाई किसी सरकारी कार्रवाई या बचाव अभियान से नहीं, साइबर गिरोह को प्रति युवक 3.80 लाख रुपये मिलने के बाद हुई। परिवारों ने गहने बेचकर और दोस्तों से चंदा जुटाकर यह रकम भेजी, तब जाकर छह जुलाई को तीनों युवकों का पासपोर्ट लौटाकर साइबर ठगों ने उन्हें म्यावड्डी शहर में छोड़ दिया। तीनों युवक अब म्यावड्डी शहर में एनजीओ के सेफ हाउस में सुरक्षित हैं, लेकिन भारत लौटने के लिए भी उनके पास पैसे नहीं बचे है। ऐसे में युवक दूतावास से गुहार लगा रहे हैं कि किसी तरह उनकी वतनवापसी कराई जाए।
युवकों की पहचान
पडरौना शहर के महाराणा प्रताप नगर निवासी मोहम्मद उस्मान अंसारी, हसन रजा और बिहार के सीतामढ़ी जिले के परिहार थाना क्षेत्र के शहरगांवा निवासी अनुरंजन कुमार अप्रैल में टेलीग्राम पर मिले एक हजार डॉलर प्रतिमाह वेतन के लालच में म्यांमार पहुंचे थे। यांगून से उन्हें म्यावड्डी के पहाड़ी जंगलों में स्थित साइबर फ्रॉड सेंटर ले जाया गया। वहां पहुंचते ही उनके पासपोर्ट छीन लिए गए और ऑनलाइन ठगी कराने के लिए मजबूर किया गया। युवकों ने बताया कि करीब तीन महीने तक उनसे रोज 14-14 घंटे काम कराया गया। विरोध करने पर मारपीट की गई। कई बार भरपेट भोजन भी नहीं दिया गया। बरसात के पानी से नहाना पड़ता था और पीने के लिए भी साफ पानी नहीं मिलता था। मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बन गई थी।
धन जुटाने की मजबूरी
बाद में गिरोह ने तीनों को छोड़ने के लिए प्रति युवक 3.80 लाख रुपये की मांग रखी। रकम जुटाने के लिए उनकी पत्नियों ने अपने जेवर बेच दिए, जबकि दोस्तों और रिश्तेदारों ने चंदा जुटाकर मदद की। युवकों ने बताया कि पहले उनके बताए खाते में पैसे भेजने की कोशिश की गई, लेकिन वह साइबर फ्रॉड से जुड़ा खाता होने के कारण लेनदेन नहीं हो सका। इससे नाराज गिरोह के लोगों ने तीनों को 48 घंटे तक बांधकर बेल्ट और बंदूक की बट से बेरहमी से पिटाई की। लगातार पिटाई के दौरान उन्हें खाना तक नहीं दिया गया। इसके बाद गिरोह ने दुबई का दूसरा बैंक खाता उपलब्ध कराया। उसी खाते में पूरी रकम पहुंचने के बाद छह जुलाई को तीनों युवकों को पासपोर्ट वापस कर म्यावड्डी शहर में छोड़ दिया गया। म्यावड्डी शहर पहुंचने के बाद तीनों युवकों ने भारतीय दूतावास से संपर्क किया। दूतावास के माध्यम से उनका संपर्क एक स्वयंसेवी संस्था (एनजीओ) से कराया गया, जिसने उन्हें अपने सेफ हाउस में ठहराया है। फिलहाल वहां उन्हें समय पर भोजन और सुरक्षित रहने की सुविधा मिल रही है।
वतन वापसी की चिंता
हालांकि, अब उनके सामने नई आर्थिक परेशाशी खड़ी है। परिवार गहने बेच चुका है और दोस्तों से उधार लेकर फिरौती की रकम जुटाई गई थी। अब भारत लौटने के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं। मो. उस्मान और हसन रजा का कहना है कि स्वदेश लौटने में प्रति व्यक्ति करीब 50 हजार रुपये का खर्च आएगा। तीनों ने भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय से अपील की है कि उनकी भारत वापसी की व्यवस्था कराई जाए।
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सब कुछ बेचकर छुड़ाया, अब घर लौटने के पैसे भी नहीं :
मो. उस्मान, हसन रजा और अनुरंजन कुमार के परिवार फिरौती की रकम जुटाने के बाद आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुके हैं। पत्नियों ने अपने जेवर बेच दिए और परिचितों ने चंदा जुटाकर मदद की। अब स्थिति यह है कि भारत लौटने के लिए भी उनके पास पैसे नहीं हैं। तीनों युवकों ने सरकार और समाजसेवी संस्थाओं से स्वदेश वापसी में सहयोग की अपील की है।


