राजकीय और माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य हुए दक्ष
छिबरामऊ में, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने प्रधानाचार्यों को दक्ष बनाने हेतु तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें विद्यालय प्रबंधन, शैक्षिक नेतृत्व और नवाचार पर जानकारी दी गई। डायट प्राचार्य ने शिक्षकों के लिए सकारात्मक बदलाव की भूमिका पर बल दिया। शिक्षकों ने प्रशिक्षण में सीखीं बातों को विद्यालयों में लागू करने का संकल्प लिया।
छिबरामऊ, संवाददाता। राजकीय एवं माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को कार्य एवं दायित्वों के प्रति दक्ष बनाने के उद्देश्य से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, लखनऊ द्वारा विकसित ‘दक्ष’ मॉड्यूल के तहत तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में किया गया। प्रशिक्षण में विद्यालय प्रबंधन, शैक्षिक नेतृत्व, अधिगम, गुणवत्ता, मूल्यांकन, नवाचारों के संवर्धन, सामुदायिक सहभागिता तथा अंतरविभागीय समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी गई। डायट प्राचार्य डॉ.अमित कुमार सिंह ने प्रशिक्षण के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यालय प्रमुख सकारात्मक बदलाव के सृजनकर्ता होते हैं। उनके नेतृत्व में माध्यमिक शिक्षा में गुणात्मक परिवर्तन लाने के साथ ही विकसित भारत के लिए योग्य एवं सकारात्मक सोच वाले नागरिक तैयार करने में मदद मिलेगी।
प्रशिक्षण प्रभारी डॉ.सुधाकरन ने कहा कि बदलती शैक्षिक परिस्थितियों में इस प्रकार का प्रशिक्षण वर्तमान समय की आवश्यकता है। मास्टर ट्रेनर सुमित कुमार गुप्ता ने नई शिक्षा नीति-2020, लक्ष्य निर्धारण, स्व-विकास तथा नेतृत्वकर्ता के रूप में प्रधानाचार्यों के अकादमिक एवं शैक्षिक दायित्वों की जानकारी दी। मास्टर ट्रेनर अच्युत त्रिपाठी ने तनावपूर्ण वर्तमान परिवेश में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व और स्वस्थ रहने के उपाय बताए। वहीं मास्टर ट्रेनर सुशील दुबे ने विद्यालयों के बेहतर परिणाम के लिए विभिन्न विभागों के साथ प्रभावी अंतरविभागीय समन्वय स्थापित करने के तौर-तरीकों पर प्रकाश डाला। प्रशिक्षण के दौरान प्रधानाचार्यों ने विभिन्न गतिविधियों में प्रतिभाग कर प्राप्त जानकारी को विद्यालय स्तर पर लागू करने का संकल्प लिया।


