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सावधान! मोबाइल से लोगों का पैसा चुरा रहा नया मालवेयर, जानें इससे बचने के उपाय

मालवेयर कैफेकॉपी से रहें सावधान
मालवेयर कैफेकॉपी से रहें सावधान

देश में एक नए मालवेयर कैफेकॉपी ट्रोजन का पता लगा है। यह लोगों की जानकारी के बिना उनके मोबाइल फोन से पैसा चुरा रहा है। साइबर सुरक्षा कंपनी कैस्परस्काई ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है। इसके अनुसार, इस मालवेयर के करीब 40 फीसदी शिकार हुए लोग भारत के हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कैस्परस्काई लैब विशेषज्ञों ने पर्दाफाश किया कि यह मोबाइल मालवेयर वैप (डब्ल्यूएपी) बिलिंग भुगतान प्रणाली को निशाना बना रहा है। यह मालवेयर लोगों की जानकारी के बिना उनके मोबाइल फोन के खाते से पैसा गायब कर रही है। कैफेकॉपी ट्रोजन मालवेयर बैटरीमास्टर जैसे उपयोगी एप्स में छिपा होता है और यह सामान्य ढंग से काम करता है। ट्रोजन डिवाइस में गोपनीय रूप से डाटा चुराने वाला कोड लोड कर देता है।

रिपोर्ट के अनुसार, एप के एक बार सक्रिय हो जाने पर कैफेकॉपी मालवेयर वायरलेस एप्लीकेशन प्रोटोकॉल (वैप) बिलिंग के साथ वेब पेज पर क्लिक करता है। वैप मोबाइल भुगतान का एक तरीका है जोकि उपभोक्ता के मोबाइल फोन बिल से सीधे चार्ज काट लेता है। इसके बाद मालवेयर चुपके से फोन पर कई सेवाओं को सब्सक्राइब कर लेता है। इस प्रक्रिया में रजिस्ट्रेशन के लिए डेबिट या क्रेडिट या फिर यूजरनेम या पासवर्ड की जरूरत नहीं पड़ती है। 

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कैस्परस्काई के अनुसार, मालवेयर कैप्चा सिस्टम से बचकर निकलने की तकनीक इस्तेमाल करता है, जिससे मोबाइल उपभोक्ता को किसी तरह से पता न चले। कैप्चा सिस्टम में वेबसाइट कुछ अक्षर या नंबर दिखाता है जिसे उपभोक्ता को खुद भरना होता है। 

कैस्परस्काई की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक महीने के अंदर कैफेकॉपी ट्रोजन ने 47 देशों में 4800 से अधिक उपभोक्ताओं को निशाना बनाया। इन देशों में भारत, रूस, तुर्की और मैक्सिको भी शामिल हैं। कैस्परस्काई लैब प्रोडक्ट ने 37.5 फीसदी हमलों का पता लगाया और इन्हें ब्लॉक किया। 

कैस्परस्काई लैब के वरिष्ठ मालवेयर विश्लेषक, रोमन उनचेक का कहना है कि कैफेकॉपी उन देशों को निशाना बना रहा है जहां वैप बिलिंग प्रणाली ज्यादा इस्तेमाल में लाई जा रही है। यह मालवेयर टैक्स्ट संदेशों के जरिए भी एक मोबाइल डिवाइस से दूसरे मोबाइल नंबरों पर जा रहा है। 

अगली स्लाइड में जानें इस समस्या से बचने के उपाय-

इन 7 तरीकों से वायरस से बचें
इन 7 तरीकों से वायरस से बचें

कैसे बचें
- एंड्रायड उपभोक्ता कोई भी एप डाउनलोड करने से पहले काफी सावधानी बरतें
- थर्ड पार्टी एप को डाउनलोड न करें
- बिना वेरिफाइड पब्लिशर्स का एप डाउनलोड न करें
- मोबाइल में प्रीमियम एंटी वायरस का इस्तेमाल करें
- फ्री एंटी वायरस से बचें, क्योंकि कई बार ये खुद ही मैलवेयर का काम करते हैं
- मोबाइल में सिक्योरिटी सेटिंग्स में जाकर अननोन सोर्सेस ऑप्शन को ऑफ रखें
- समय-समय पर मोबाइल फोन के सॉफ्टवेयर को अपडेट करते रहें

बड़े साइबर हमले
- याहू (2013): ये अब तक का सबसे बड़ा डाटा चोरी का मामला था। इस साइबर हमले में करीब एक अरब अकाउंट से डाटा चोरी किया गया। 
- ईबे (2014): 14.50 करोड़ यूजर्स को पासवर्ड बदलने को कहा गया था। साइबर हमले में हैकर्स ने उपभोक्ताओं का पासवर्ड, नाम और जन्मतिथि जैसा डाटा चोरी कर लिया था। 
- सोनी (2014): सोनी पिक्चर एंटरटेनमेंट पर हुए साइबर हमले में 47 हजार कर्मचारियों और कलाकारों की निजी जानकारी लीक हो गई थी। 
- यूएस सेंट्रल कमांड (2015): हैकर्स ने दावा किया कि सेंट्रल कमांड के यूट्यूब और ट्विटर के लिंक उन्होंने हैक कर लिए हैं। दावे को सच साबित करने के लिए कमांड का लोगो चेंज कर उसकी जगह एक नकाबपोश का चेहरा लगा दिया गया था। 
- एश्ले मेडिसन (2015): एडल्ट डेटिंग वेबसाइट को हैक करने के बाद हैकर्स ने इसके 3.7 करोड़ उपभोक्ताओं के नाम जाहिर करने की धमकी दी थी। 
- टॉक-टॉक (2015): करीब 1.57 लाख उपभोक्ताओं की निजी जानकारी हैकर्स ने हासिल कर ली। 15,656 अकाउंट्स नंबर, सॉर्ट कोड और क्रेडिट कार्ड जानकारी चोरी कर ली। 
- माय स्पेस (2016): माना जाता है कि 36 करोड़ पासवर्ड और ई-मेल कुछ साल पहले चोरी कर लिए गए। इन्हें छिपे हुए इंटरनेट मार्केटप्लेस में प्लेस किया गया।
- वानाक्राई रैनसमवेयर (मई 2017) : इस वायरस का 150 से अधिक देशों पर हमला, 2 लाख से अधिक कंप्यूटर चपेट में, बिटक्वाइन में फिरौती मांगी


लॉकी रैनसमवेयर को लेकर सरकार ने चेताया 
 लॉकी रैनसमवेयर के भारत में आने की आशंका के मद्देनजर केंद्र सरकार ने हाल ही में उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की चेतावनी दी थी। भारतीय कम्प्यूटर इमरजेंसी रेस्पॉन्स टीम (आईसीईआरटी) के मुताबिक, 'स्पैम मेल्स' का इस्तेमाल रैनसमवेयर को फैलाने के लिए किया जा रहा है। 

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  • Web Title:this new malware steals money from mobile phone says report