DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

प्राचीन पांडुलिपियों को अनुवादित करने, पढ़ने की जरूरत: देबरॉय

manuscripts

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) के चेयरमैन बिबेक देबरॉय ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश में विभिन्न विषयों की पांडुलिपियों की समृद्ध धरोहर है। इसे सभी के लाभ के लिये अनुवादित करने की जरूरत है।आब्जर्वर रिसर्चर फाउंडिशन (ओआरएफ) में 'हमारे समय में महाभारत की प्रासंगिकता विषय पर अपने संबोधन में देबरॉय ने कहा कि राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन ने 38 लाख पांडुलिपियों को सूचीबद्ध किया है।

indian manuscript
 

एक अनुमान के अनुसार देश में सरकारी और निजी संग्रह के तौर पर 4 करोड़ पांडुलिपियां हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अनुसार जोहान्स गुटेनबर्ग द्वारा 15वीं सदी में प्रिंटिंग प्रेस की खोज के बाद से 13 करोड़ किताबों का प्रकाशन हुआ है।

देबरॉय ने कहा कि 4 करोड़ पांडुलिपियों में से 95 प्रतिशत का अब तक अनुवाद नहीं हुआ है। दो तिहाई पांडुलिपि संस्कृत में हैं। उन्होंने कहा, ''हमें नहीं पता कि किन विषयों पर ये पांडुलिपि उपलब्ध हैं... इसे अनुवादित करने और पढ़ने का यह उपयुक्त समय है। देबरॉय ने स्वयं संपूर्ण महाभारत का अनुवाद किया है।

पीएमईएसी के चेयरमैन ने कहा कि कौटिल्य का अर्थशास्त्र ही केवल राजकाज पर नहीं लिखा गया है, इस विषय पर कई अन्य पुस्तकें भी हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:this is the right rime to translate the manuscripts says Bibek Debroy