प्रेमचंद की लेखनी ने कराया बदलाव का अनुभव : प्रो.चतुर्वेदी

हिन्दुस्तान, वाराणसी
Follow us on Google News
share

वाराणसी में बीएचयू के कुलपति प्रो.अजित कुमार चतुर्वेदी ने प्रेमचंद की साहित्यिक यात्रा और समाज में उनके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का लेखन आज भी समाज को प्रभावित करता है। कार्यक्रम में अन्य विद्वान ने भी प्रेमचंद की महानता के बारे में विचार व्यक्त किए।

प्रेमचंद की लेखनी ने कराया बदलाव का अनुभव : प्रो.चतुर्वेदी

वाराणसी। आज हम जिस समाज में जी रहे हैं तथा जिस सामाजिक बदलाव को महसूस कर पाते हैं, वहां तक का सफर तय करने में प्रेमचंद की लेखनी का अतुलनीय योगदान है। प्रेमचंद ने सामाजिक रूढ़ियों का विरोध किया। ये बातें बीएचयू के कुलपति प्रो.अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहीं। वह शुक्रवार को लमही में ‘प्रेमचंद मेरे लिए’ विषय पर आयोजित परिसंवाद की अध्यक्षता कर रहे थे। मुंशी प्रेमचंद स्मारक एवं शोध संस्थान में बीएचयू कला संकाय की ओर से आयोजित कार्यक्रम में प्रो.चतुर्वेदी ने कहा कि मुंशीजी ने अपने जीवन तथा साहित्य के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाने का प्रयास किया। उनके विचार आज भी लोगों के निर्णयों, दृष्टिकोणों और जीवन-मूल्यों को प्रभावित करते हैं। प्रेमचंद केवल अतीत के साहित्यकार नहीं। वह वर्तमान और भविष्य के भी मार्गदर्शक हैं। उन्होंने प्रेमचंद जयंती समारोह को प्रेमचंद उत्सव में बदलने का सुझाव दिया。

विशिष्ट वक्ता की राय

विशिष्ट वक्ता दिल्ली विवि के प्रो.आशुतोष कुमार ने कहा कि 20वीं शताब्दी में आधुनिक भारतीय राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में जिन तीन प्रमुख व्यक्तित्वों का विशेष योगदान रहा है उनमें एक प्रेमचंद हैं। दो अन्य नाम गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर और अल्लामा इकबाल के हैं। 1917 के बाद चंपारण सत्याग्रह और रूस की क्रांति जैसी घटनाओं का प्रभाव प्रेमचंद के लेखन पर स्पष्ट दिखता है।

कथाकार का योगदान

कथाकार अखिलेश ने कहा कि प्रेमचंद ने अपने लेखन के माध्यम से समाज को नई दृष्टि प्रदान की। प्रो.अरुण कमल ने कहा कि प्रेमचंद की जन्मस्थली लमही साहित्य का तीर्थ है। कला संकाय प्रमुख प्रो.सुषमा घिल्डियाल ने कहा कि प्रेमचंद जयंती समारोह साहित्य और समाज के बीच संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। परिसंवाद के दूसरे सत्र में प्रो.अनुराग दवे, डॉ.अविनाश कुमार सिंह, प्रो.प्रभाकर सिंह ने विचार व्यक्त किए। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो.आशीष त्रिपाठी ने की। संचालन डॉ.किरण तिवारी ने किया।

बच्चों का प्रवेश रोका गया

परिसंवाद में प्रवेश से रोक गए बच्चे

बीएचयू की ओर से लमही में हुए आयोजन में एक तरफ वीसी प्रो.चतुर्वेदी बच्चों और युवाओं को प्रेमचंद के साहित्य से जोड़ने की हिमायत कर रहे थे। उसी समय सभागार के द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने तीन स्कूली बच्चों को अंदर जाने से रोक दिया। उनका कहना था अधिकारियों का आदेश है कि बच्चे अंदर न आएं। सेंट थॉमस स्कूल के वीर प्रताप पाल, सन वैली स्कूल के उमेश और दीपक को निराश होकर सभागार के द्वार से लौटना पड़ा।

प्रेमचंद की जयंती

मूर्ति के सानिध्य में मनाई प्रेमचंद की जयंती

जन कल्याण परिषद की ओर से मुंशी प्रेमचंद की जयंती लहुराबीर स्थित उनकी मूर्ति के समक्ष श्रद्धापर्वक मनाई गई। प्रदेश अध्यक्ष गंगा सहाय पांडेय ने मुंशी प्रेमचंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। एसपी श्रीवास्तव, डॉ.अंजनी कुमार मिश्रा, सुनील कुमार गुप्ता, राधेमोहन पांडेय, अरुण कुमार मिश्रा, तीर्थेश्वर प्रसाद सिंह, सुनील कुमार पांडेय, शशिकांत तिवारी ने विचार रखे। इसके बाद हुई कवि गोष्ठी में विजयचंद्र त्रिपाठी, दिनेशदत्त पाठक, योगी रणजीत मिश्रा, सतीश कुमार कसेरा, प्रवीण कुमार पांडेय, जीतेंद्र श्रीवास्तव ‘टोपी’, शिव कुमार पांडेय, अनिल कुमार शर्मा, गणेश सिंह ‘प्रहरी’ ने काव्यपाठ किया। अध्यक्षता बृजेशचंद्र श्रीवास्तव, संचालन भुलक्कड़ बनारसी और धन्यवाद ज्ञापन रणजीत मिश्र ने किया।

सांस्कृतिक संध्या

प्रेमचंद की कहानी घासवाली का नाट्य मंचन

सेतु और इप्टा की ओर से मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर सांस्कृतिक संध्या हुई। शिवपुर स्थित अशोक मिशन जन नाट्यशाला शिवपुर में गीत-संगीत के आयोजन के बाद मुंशीजी की कहानी घासवाली पर आधारित नाटक का मंचन किया गया गया। सेतु के कलाकारों ने सलीम राजा के निर्देशन में नाटक किया। आगतों का स्वागत अशोक आनंद ने किया।

सामान्य प्रश्न

किस विषय पर परिसंवाद आयोजित किया गया था?
परिसंवाद ‘प्रेमचंद मेरे लिए’ विषय पर आयोजित किया गया था।
Arvind Mishra

लेखक के बारे में

Arvind Mishra

शार्ट बायो : सांस्कृतिक समीक्षक के रूप में हिंदी पत्रकारिता में खास पहचान रखने वाले अरविन्द मिश्र अपने परिवार में तीसरी पीढ़ी के पत्रकार हैं। उनके दादा स्व.पं.जनार्दन दत्त मिश्र ‘व्यास’ ने आजादी की लड़ाई में अपनी लेखनी से देश की सेवा की। उनके पिता नवगीतकार स्व.पं.अशोक मिश्र ‘सामयिक’ ने देश के कई राष्ट्रीय समाचार पत्रों में उच्च पदों पर सेवाएं दीं।


परिचय एवं अनुभव

अरविन्द मिश्र, हिंदी सांस्कृतिक पत्रकारिता का जाना पहचाना नाम है। बीते ढ़ाई दशक से अधिक समय से हिंदी पत्रकारिता की मुख्य धारा में बतौर सांस्कृतिक पत्रकार कार्यरत हैं। पत्रकारिता की शुरुआत क्राइम रिपोर्टर के रूप में हुई। दैनिक आज और अमर उजाला के लिए अर्से तक धर्म-संस्कृति की रिपोर्टिंग के साथ-साथ खेल पत्रकारिता भी की। रंगमंच, साहित्यिक मंच और संचालन विधा पर लेखन करने के साथ ही स्वयं उक्त विधाओं से जुड़े भी हैं।


करियर का सफर

अरविन्द मिश्र ने विद्यार्थी जीवन के दौरान ही काशी के सांध्यकालीन एवं साप्ताहिक समाचार पत्रों के लिए लिखना शुरू कर दिया था। वर्ष 1997 में दैनिक आज से जुड़कर मुख्य धारा की पत्रकारिता आरंभ की। आज अखबार चार वर्ष सेवा देने के बाद वर्ष 2002 में दैनिक अमर उजाला के वाराणसी संस्करण से बतौर रिपोर्टर जुड़े। वर्ष 2008 से 2012 तक अमर उजाला कॉम्पैक्ट की डेस्क और रिपोर्टिंग टीम को लीड किया। बरेली में अमर उजाला कॉम्पैक्ट की लॉन्चिंग कराई। वर्ष 2013 में दैनिक हिन्दुस्तान के पटना संस्करण से जुड़े। हिन्दुस्तान की ‘पटना लाइव’ टीम को चार वर्षों तक लीड किया। वर्ष 2018 से वाराणसी में बतौर मुख्य संवाददाता कार्यरत हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि और रिपोर्टिंग

हाईस्कूल की परीक्षा विज्ञान वर्ग के विद्यार्थी के रूप में उत्तीण करने के बाद इंटरमीडिएट की परीक्षा वाणिज्य विषय से दी। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा यूपी बोर्ड से उत्तीर्ण की। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से वर्ष 1994 में बीकॉम की पढ़ाई पूरी की। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण एम.कॉम की पढ़ाई पूरी नहीं हो सकी। बहुत ही कम समय में अरविन्द मिश्र ने अमर उजाला में सांस्कृतिक पत्रकारिता के नवीन मानदण्ड स्थापित कर दिए। इस दौरान उन्होंने ‘काशी परिक्रमा’, ‘आमने-सामने’ और ‘देखी तुम्हरी काशी’ जैसे कॉलमों के माध्यम से अपनी लेखनी को धार दी। प्रदूषण की मार झेल रही गंगा पर उन्होंने विशेष रूप से कार्य किया। गंगा पर उनके विशिष्ट लेखन से प्रभावित होकर ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरुशंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उन्हें गंगारविन्द नाम दिया। सोशल मीडिया पर अरविन्द मिश्र इसी नाम से पहचाने जाते हैं। हिन्दुस्तान से जुड़ने के बाद अरविन्द मिश्र ने सांस्कृति पत्रकारिता में मील के कई पत्थर स्थापित किए। उन रिपोर्ट में रामनगर की रामलीला, नाटी इमली के भरत मिलाप से लेकर काशी में होने वाले धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों की अनेकानेक रिपोर्ट शामिल हैं। संकट मोचन संगीत समारोह और काशी के अति प्राचीन बेनियाबाग के इतिहास को पहली बार कलमबंद करने का श्रेय भी अरविन्द मिश्र को ही जाता है। उन्हें हिन्दुस्तान अखबार की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर दिए जाने वाले ‘होनहार अवार्ड’ इंडिवीजुअल कैटेगरी में छह बार दिए जा चुके हैं। जिन समाचार शृंखलाओं के लिए उन्हें यह अवार्ड मिले उनमें ‘काकोरी काण्ड के नायक’, ‘मैं बेनियाबाग हूं’, ‘प्रेमचंद के बहाने’, ‘प्रेमचंद से छल’, ‘सब्जीवाला शायर’ और ‘गंगा कावेरी’ शामिल हैं। संकट मोचन संगीत समारोह, काशी तमिल संगमम, बनारस लिट् फेस्ट जैसे वृहद आयोजनों की यादगार कवरेज की कटिंग पाठकों ने सहेज कर रखी है। 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सफल लैंडिंग के दिन अरविन्द मिश्र ने 23 अगस्त की तारीख को चंद्रयान दिवस के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की पहल छेड़ी। इसका नतीजा यह हुआ कि दक्षिण अफ्रीका की यात्रा से लौट कर सीधे इसरो पहुंचे प्रधानमंत्री ने इस दिन को नेशनल स्पेस डे के रूप में मनाने की घोषणा कर दी।


विशेषज्ञता

अरविन्द मिश्र निश्चित रूप से सांस्कृति पत्रकार के रूप में अपनी खास पहचान रखते हैं लेकिन मानवीय कोणों वाली स्टोरी, शिक्षा, खेल और प्रशासनिक रिपोर्टिंग में भी अपनी दक्षता प्रमाणित की है। एक सफल रिपोर्टर होने के साथ ही उन्होंने अपने आप को एक छायाकार के रूप में भी स्थापित किया। हिन्दुस्तान समाचार पत्र में पटना और वाराणसी संस्करण में सौ से अधिक फोटोग्राफ पर बाइलाइन मिल चुकी है। काशी में देवदीपावली के उत्सव की उनके द्वारा ली गई तस्वीर को हिन्दुस्तान के देशभर के सभी संस्करणों में प्रमुखता से स्थान मिल चुका है।

और पढ़ें
Hindi News , इंडिया न्यूज़ , आज का मौसम , विधानसभा चुनाव और Sawan 2026 से जुड़ी ताज़ा खबरों व पल-पल के अपडेट के लिए लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े रहें। UP Chunav 2027 , UP Vidhan Sabha Seats और UP Vidhan Sabha Candisates से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण खबरें और जानकारी यहां पढ़ें। सभी बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ऐप अभी डाउनलोड करें।