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स्वतंत्रता दिवस 2018: भारत के ये प्रधानमंत्री लाल किले से नहीं फहरा सके तिरंगा

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर

पूर्व पीएम चंद्रशेखर एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्हें लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्र को संबोधित करने का अवसर नहीं मिला। पंडित जवाहर लाल नेहरु और लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु होने के समय दो बार कुछ-कुछ समय के लिये प्रधानमंत्री का पद संभालने वाले गुलजारी लाल नंदा को भी यह राष्ट्रीय अवसर नहीं मिला।

मोदी करेंगे राजीव और राव की बराबरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्रता दिवस पर बुधवार को जब लाल किले के प्राचीर पर राष्ट्रीय ध्वज फहरायेंगे तो वह पांच या उससे अधिक बार यह सम्मान हासिल करने वाले देश के सातवें और दूसरे गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री होंगे। मई 2014 में देश की बागडोर संभालने वाले मोदी ने उस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया था और बुधवार को वह पांचवीं तथा अपने मौजूदा कार्यकाल में अंतिम बार लालकिले पर तिरंगा फहरायेंगे। ऐसा करने वाले वह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दूसरे नेता होंगे। पूर्व प्रधानमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी छह बार लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा चुके हैं। 

पूर्व प्रधानमंत्रियों राजीव गांधी और पी वी नरसिम्हा राव ने भी पांच-पांच बार लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और बुधवार को मोदी उनके बराबर आ जायेंगे।

नेहरु ने फहराया 17 बार तिरंगा

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की बात की जाए तो अब तक पहले  प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु का रिकार्ड नहीं टूट पाया है। पंडित नेहरु ने 1947 से लेकर 1963 तक लगातार 17 बार लाल किले की प्राचीर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और राष्ट्र को संबोधित किया।  उनकी पुत्री और देश की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी इस रिकार्ड के निकट तक पहुंची लेकिन वह इसकी बराबरी नहीं कर पायी। इंदिरा गांधी को 16 बार तिरंगा फहराने का अवसर मिला। उन्होंने 1966 से लेकर 1976 तक लगातार 11 बार तथा 1980 से लेकर 1984 तक पांच बार लालकिले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसके बाद मनमोहन सिंह का नंबर आता है जिन्होंने 10 बार लाल किले के प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया है।

चार प्रधानमंत्री सिर्फ एक-एक बार फहरा पाए तिरंगा

आपातकाल के बाद 1977 में केंद्र में बनी पहली गैर कांग्रेसी सरकार का नेतृत्व करने वाले मोरारजी देसाई को दो बार लालकिले के प्राचीर पर झंडा फहराने का मौका मिला। चार प्रधानमंत्रियों चौधरी चरण सिंह, विश्वनाथ प्रताप सिंह, एचडी देवेगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल को एक-एक बार यह सम्मान मिला।

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  • Web Title:The story of Indian PMs and the tiranga at Red Fort