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5 दिसंबर, 2020|11:04|IST

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केंद्र का विशेष आर्थिक पैकेज महज 'एक बड़ा शून्य' है, उसमें राज्यों के लिए कुछ नहीं-ममता बनर्जी

west bengal chief minister mamata banerjee said  i will take legal action if get  complaint of money l

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से कोविड-19 संकट से देश को उबारने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज के ऐलान किए जाने के एक दिन बाद बाद वित्तमंत्री की तरफ से बुधवार को MSMEs के लिए बिना गारंट लोन और ईपीएफओ समेत अनेक राहत के कदमों का ऐलान किया गया। लेकिन, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे एक बड़ा शून्य करार दिया है। 

ममता ने कहा कि केंद्र संघीय व्यवस्था को ध्वस्त करने और आर्थिक पैकेज से लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा केंद्र के पैकेज में असंगठित क्षेत्र, सार्वजनिक व्यय और रोजगार सृजन के लिए कुछ नहीं है। पश्चिम बंगाली की सीएम ने कहा कि केंद्र का विशेष आर्थिक पैकेज महज 'एक बड़ा शून्य' है, उसमें राज्यों के लिए कुछ नहीं है।

चिदंबरम ने कहा, कड़ी मेहनत करनेवालों पर कुठाराघात

पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री पी. चिंदबरम ने भी कहा कि एमएसएमई क्षेत्र के लिए घोषित मामूली पैकेज को छोड़कर हम वित्त मंत्री की घोषणाओं से निराश हैं। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने जो कुछ कहा, उसमें लाखों गरीबों, भूखे प्रवासी श्रमिकों के लिए कुछ नहीं है जो पैदल चलकर अपने घर जा रहे हैं। यह हर दिन कड़ी मेहनत करने वालों पर कुठाराघात है।

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एमएसएमई इकाइयों को बिना गारंटी के 3 लाख करोड़ रुपये के कर्ज की सुविधा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसमएई) समेत उद्यमों को बिना गारंटी वाले 3 लाख करोड़ रुपये के कर्ज की सुविधा देने की घोषणा की। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा मंगलवार को घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज का ब्योरा देते हुए संवाददाताओं को बताया कि इस स्वचालित कर्ज सुविधा से 45 लाख इकाइयों को लाभ होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस महामारी और उसकी रोकथाम के लिये जारी 'लॉकडाउन के आर्थिक प्रभाव से निपटने के लिये 20 लाख करोड़ रुपये के प्रेत्साहन पैकेज की घोषणा की थी। वित्त मंत्री ने कहा कि यह कर्ज चार साल के लिये दिया जाएगा और 12 महीने तक किस्त से राहत दी जाएगी।

इसके अलावा इस समय कर्ज नहीं चुका पा रही एमएसएमई इकाइयों के लिए भी कुल 20,000 करोड़ रुपये के कर्ज की सुविधा दी जाएगी। इससे 2 लाख इकाइयों को लाभ होगा। सीतारमण ने कहा कि एमएसएमई्र के लिये 'फंड ऑफ फंड गठित किया जा रहा है, इसके जिरये वृद्धि की क्षमता रखने वाले एमएसएमई में 50,000 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी डाली जाएगी।

इसके साथ एमएसएमई की परिभाषा बदली गयी है। इसके तहत अब एक करोड़ रुपये तक के निवेश वाली इकाइयां सूक्ष्म इकाई कहलाएगी। अबतक यह सीमा 25 लाख रुपये थी। उन्होंने कहा कि इसके साथ एमएसएमई की परिभाषा के लिये कारोबार आधारित मानदंड बनाया गया है। इसके तहत 5 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली इकाइयां भी सूक्ष्म इकाइयां कहलाएंगी। मुख्य रूप से लघु इकाइयों को को परिभाषित करने के लिये यह मानदंड लाया गया है।

सीतारमण ने कहा कि लघु एवं मझोले उद्यमों के लिये निवेश और कारोबार सीमा बढ़ाने के जरिये उन्हें वित्तीय और अन्य लाभ उठाने की अनुमति दी गयी है। उन्होंने यह भी कहा कि 200 करोड़ रुपये तक के लिये सरकारी खरीद को लेकर वैश्विक निविदा पर पाबंदी होगी। इससे एमएसएमई को सरकारी निविदाओं में भाग लेने, प्रतिस्पर्धा करने और आपूर्ति करने में मदद मिलेगी।

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  • Web Title:The special economic package of the Centre is just a big zero nothing for the states in it says Mamta Banerjee