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मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस: जानें रेड टी-शर्ट की मिस्ट्री जो NIA तक नहीं पहुंच पायी

Swami Aseemanand

हैदराबाद में साल 2007 में हुए मक्का मस्जिद ब्लास्ट में पाचों आरोपियों को बरी किए जाने की सबसे बड़ी वजह थी सबूतों की कमी। जबकि, एक आर्टिकल में यह कहा गया कि जिस वक्त सीबीआई से साल 2011 में यह केस ट्रांसफर किया गया उसके बाद एनआईए कभी भी उस सबूत तक पहुंच ही नहीं पायी।

धमाके की जगह से एक लाल रंग की टी-शर्ट स्थानीय पुलिस को बरामद हुई थी जो वहां पर बम प्लांट करनेवालों में से किसी एक की थी। अंग्रेजी के एक अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि जांच के दौरान इसे गायब कर दिया गया। इस केस की बाद में पड़ताल करने वाले पूर्व एनआईए के स्पेशल डायरेक्टर एन.आर. वासन ने लाल रंग की टी-शर्ट की पुष्टि की। वास्तव में वहां तक एनआईए पहुंच ही नहीं पायी। उन्होंने बताया कि हकीकत में उन्हें नहीं पता कि उस टी-शर्ट का क्या हुआ और उसको सुरक्षित रखने के लिए कौन जिम्मेवार था।

आरोपियों ने 18 मई 2007 को मक्का मस्जिद के पास बम से भरा हुआ दो बैग छोड़ा था। लेकिन, उनमें से सिर्फ एक में ही धमाका हुआ। पुलिस ने दूसरे बैग से विस्फोटक आईईडी के साथ चाभी और लाल रंग की टी-शर्ट बरामद की। जांच सीबीआई के हवाले किया गया, जिन्होंने इस केस में चार्जशीट फाइल की। साल 2010 में यह केस एनआईए के पास गया, जिन्होंने लगातार तीन चार्जशीट दाखिल की। इनमें सात लोगों का नाम शामिल किया गया। ये नाम थे- स्वामी असीमानंद, देवेन्द्र गुप्ता, रांमचंद्र कालसांग्रे, संदीप डांगे, राजेन्द्र चौधरी, भारत रतिश्वर और लोकेश शर्मा।
   
एनआईए के सूत्रों ने यह बताया कि एक तरफ जहां सीबीआई से सभी सबूत और केस से संबंधित पेपर्स एनआईए के हवाले किया गया तो वहीं दूसरी तरफ लाल रंग की टी-शर्ट कभी एनआईए तक नहीं पहुंच पायी।

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  • Web Title:The Mystery Of Red T-Shirt That Could Not reached to the NIA in Mecca Masjid Blast Case