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7 मई, 2021|1:01|IST

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घरवालों से छुपकर लिया था कोरोना का पहला टीका, अब लोगों को दे रहें है ये सलाह

16 जनवरी को सुबह 11.10 बजे, स्वच्छता कार्यकर्ता मनीष कुमार ने कोरोना की पहली लगवाई थी, मनीष कोविड -19 वैक्सीन पाने वाले भारत के पहले व्यक्ति बने थे। 34 साल के मनीष ने अपने सभी डरों पर जीत हासिल की और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में टीका लगवाया। मनीष ने अपने परिवार और दोस्तों को इसकी जानकारी नहीं दी क्योंकि वे नहीं चाहते थे मनीष टीका लगवाएँ। 

वैक्सीन लगवाने के लगभग तीन महीने बाद मनीष ने कहा है कि टीका लगवाने के बाद भी कोरोना गाइडलाइन्स का पालन करना बेहद जरूरी है।, कुमार को कोवैक्सिन के दोनों शॉट्स मिले हैं, इस सब के बावजूद वह कोविड -19 प्रोटोकॉल का पालन करना जारी है - जहां भी वह जाते हैं, मास्क पहनना, हाथ धोना, और बाहर होने पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हैं।

वो कहते हैं, “टीका शक्तिमान नहीं है। आप मास्क पहनना बंद नहीं कर सकते और सिर्फ इसलिए घूम भी नहीं सकते हैं क्योंकि आपको एक वैक्सीन का शॉट मिला है। लेकिन अगर आप टीका लगवाके हैं, तो कोविद -19 का खतरा आपके अतीत में चला जाएगा।"

बाहरी दिल्ली के नजफगढ़ के निवासी कुमार आठ साल से स्वच्छता मशीन ऑपरेटर थे और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने उन्हें टीका लगाया था। वह अस्पताल के उन पहले लोगों में से थे, जो वैक्सीन के लिए वॉलिंटियर्स थे, लेकिन अपनी पत्नी, मां और सबसे अच्छे दोस्त से उन्हें यह छुपाना पड़ा क्योंकि वे सभी टीके के साइड इफेक्ट के कारण उन्हें वैक्सीन लगाने से मना कर रहे थे।

राजधानी दिल्ली में आ रहे नए मामलों में संक्रमण की एक दूसरी विशाल लहर के साथ दिल्ली में टीकाकरण और भी महत्वपूर्ण हो गया है। कुमार कहते हैं कि वे उन लोगों के बारे में जानते हैं जो दोनों शॉट लेने के बाद भी करंट लहर में संक्रमित थे - आखिरकार, किसी भी वैक्सीन की 100% दक्षता नहीं है - और अपने सभी सहयोगियों और पड़ोसियों से यथासंभव सुरक्षित रखने का आग्रह किया।

जब कुमार को शॉट मिला, तो ड्राइव केवल हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए खुली थी। इसके बाद से इसे 45 साल से ऊपर के किसी भी व्यक्ति के लिए खोल दिया गया है, लेकिन टीके की हिचकिचाहट और गलत जानकारी इस अभियान को रोक रही है। स्वच्छता कार्यकर्ता को प्रतिकूल प्रभाव की आशंका के चलते अपने बचपन के दोस्त शौकत अली को टीका लगवाने के लिए राजी करना पड़ा।

मनीष कहते हैं, “जब टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा था, तो कोई भी आगे नहीं आना चाहता था। मैंने स्वेच्छा से ऐसा किया। जब उन्होंने देखा कि मेरे साथ कुछ नहीं हुआ है, मेरे लगभग 40 साथी उसी दिन टीका लगाने के लिए आगे आए। लेकिन, जब उनमें से कुछ को कुछ प्रतिकूल प्रभाव मिला, तो 40 या 50 लोगों को पता था कि उन्हें शॉट नहीं मिला है। बहुत से ऐसे हैं जिन्होंने अपना दूसरा शॉट नहीं लिया क्योंकि उन्हें पहले एक के बाद बुखार आया था और दाने निकले थे"

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  • Web Title:The first vaccine of Corona was hidden from family members now giving this advice to the people