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हिंदी न्यूज़ देशनहीं थम रही भाजपा शासित कर्नाटक-महाराष्ट्र की तकरार, राउत ने कसा फडणवीस पर तंज; बोम्मई की चेतावनी

नहीं थम रही भाजपा शासित कर्नाटक-महाराष्ट्र की तकरार, राउत ने कसा फडणवीस पर तंज; बोम्मई की चेतावनी

फडणवीस ने कहा था, “महाराष्ट्र का कोई गांव कर्नाटक में नहीं जाएगा! कर्नाटक में बेलगाम-कारवार-निपानी सहित मराठी भाषी गांवों को वापस पाने के लिए राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय में मजबूती से अपना पक्ष रखेगी!

नहीं थम रही भाजपा शासित कर्नाटक-महाराष्ट्र की तकरार, राउत ने कसा फडणवीस पर तंज; बोम्मई की चेतावनी
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,मुंबईSat, 26 Nov 2022 04:19 PM
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भाजपा शासित कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच जारी सीमा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने सीमा विवाद के संबंध में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए उनके बयान को "भड़काऊ" करार दिया। इसके साथ ही अंतरराज्यीय सीमा विवाद को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। फडणवीस ने कहा था, “महाराष्ट्र का कोई गांव कर्नाटक में नहीं जाएगा! कर्नाटक में बेलगाम-कारवार-निपानी सहित मराठी भाषी गांवों को वापस पाने के लिए राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय में मजबूती से अपना पक्ष रखेगी!’’ बोम्मई ने जवाबी हमला करते इसे भड़काऊ बयान करार दिया। उन्होंने कहा, "उनका (फडणवीस) सपना कभी पूरा नहीं होगा। हमारी सरकार हमारे राज्य की भूमि, जल और सीमाओं की रक्षा के लिए कटिबद्ध है।"

कर्नाटक सीएम और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम की टिप्पणियों का असर उनके समर्थकों पर भी देखने को मिला। पुणे से मिली जानकारी के मुताबिक, मराठी समर्थक एक संगठन के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने कर्नाटक के स्वामित्व वाली बसों पर कथित तौर पर काली स्याही से ‘‘जय महाराष्ट्र’’ जैसे नारे पेंट किए और बोम्मई के खिलाफ नारे लगाए। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने राज्य की बसों पर महाराष्ट्र समर्थक नारे लिखे जाने की कथित घटनाओं की निंदा की है। 

बोम्मई ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील भी की है। बोम्मई ने शुक्रवार को कहा कि ऐसी घटनाएं राज्यों के बीच विभाजन पैदा करेंगी और इसलिए महाराष्ट्र को इस संबंध में तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए। बेलगावी को लेकर अंतर-राज्यीय सीमा विवाद के चलते दोनों राज्यों के नेताओं के बीच जारी वाकयुद्ध के बीच यह कथित घटनाएं सामने आई हैं।

एक अन्य घटना में मुंबई के माहिम बस स्टॉप पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के पोस्टर पर काली स्याही फेंकी गई। इस मसले पर सीएम बोम्मई ने कहा, "हमने महाराष्ट्र सरकार से बात की है और उन्हें कर्नाटक बसों और कन्नड़ भाषी लोगों के मामले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कहा है। हमारे गृह, डीजीपी और आईजीपी अधिकारी महाराष्ट्र के मंत्रियों से बात करेंगे।"

छत्रपति शिवाजी के अपमान मामले से ध्यान हटाने के लिए सीमा विवाद को तूल दिया गया : संजय राउत

शिवसेना (उद्धव बाला साहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने शुक्रवार को दावा किया कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के ‘‘अपमान’’ मामले से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद का मुद्दा उठाया गया है। कोश्यारी ने औरंगाबाद में पिछले सप्ताह एक कार्यक्रम में कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज ‘‘पुराने जमाने’’ के आदर्श थे। राज्यपाल के इस बयान को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट समेत कई राजनीतिक दलों ने उनकी आलोचना की है।

राउत ने यहां संवाददाताओं से कहा कि इससे पहले कोश्यारी ने अपनी टिप्पणी से मराठी भाषी लोगों का अपमान किया था कि अगर गुजरातियों और मारवाड़ियों ने शहर छोड़ दिया तो मुंबई देश की वित्तीय राजधानी नहीं रहेगी। राउत ने कहा, ‘‘उस समय इस अपमान से ध्यान भटकाने के लिए मुझे गिरफ्तार कर लिया गया था।’’ राउत पर पात्रा चॉल पुनर्विकास परियोजना से संबंधित धनशोधन का मामला दर्ज किया गया था। राउत को 100 दिनों तक जेल में रहने के बाद जमानत दी गई थी। 

उन्होंने कहा कि इसी तरह, अब सांगली में जाट तालुका पर कर्नाटक के दावे का इस्तेमाल लोगों का ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता ने कहा, ‘‘उनके लिए यह पटकथा तैयार है। हालांकि, लोग छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान नहीं भूलेंगे चाहे आप कितनी भी कोशिश कर लें।’’

कर्नाटक के मुख्यमंत्री के खिलाफ बोलने की शिंदे की हिम्मत नहीं : उद्धव

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने बृहस्पतिवार को कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे में कर्नाटक के मुख्यमंत्री के खिलाफ बोलने का साहस नहीं है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के इस दावे के बाद यह विवाद पैदा हो गया है कि महाराष्ट्र के कई सीमावर्ती गांव कभी उनके राज्य का हिस्सा बनना चाहते थे।

ठाकरे ने शिंदे पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘क्या हमने अपना साहस खो दिया है क्योंकि कर्नाटक के मुख्यमंत्री आसानी से महाराष्ट्र के गांवों पर दावा कर रहे हैं।’’ इस बीच, राकांपा प्रमुख शरद पवार ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ‘कर्नाटक के मुद्दे से भाग नहीं सकती है।’

क्या है महाराष्ट्र कर्नाटक सीमा विवाद?

बेलगावी को लेकर विवाद 1960 के दशक में भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बाद से बना हुआ है। महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार ने पिछले दिनों, उच्चतम न्यायालय में होने वाली सुनवाई के मद्देनजर कानूनी टीम के साथ समन्वय के लिए दो मंत्रियों को नियुक्त किया। बोम्मई ने कहा कि उसके तुरंत बाद राज्य ने अपना पक्ष रखने के लिए मुकुल रोहतगी और श्याम दीवान सहित कई वरिष्ठ वकीलों को तैनात किया है।

बोम्मई ने दावा किया था कि महाराष्ट्र के सांगली जिले के जाट तालुका में कुछ ग्राम पंचायतों ने पूर्व में एक प्रस्ताव पारित कर कर्नाटक में विलय की मांग की थी, जब वे गंभीर जल संकट का सामना कर रहे थे। बोम्मई ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने पानी मुहैया कराकर उनकी मदद के लिए योजनाएं तैयार की हैं और उनकी सरकार जाट गांवों के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, फडणवीस ने बुधवार को नागपुर में संवाददाताओं से कहा था, ‘‘इन गांवों ने 2012 में पानी की कमी के मुद्दे पर एक प्रस्ताव पेश किया था। वर्तमान में किसी भी गांव ने कोई प्रस्ताव पेश नहीं किया है।’’