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हिंदी न्यूज़ देशआखिरी विकल्प है ... प्रत्यर्पण के खिलाफ नीरव मोदी की याचिका पर जानें कानूनी विशेषज्ञों की राय

आखिरी विकल्प है ... प्रत्यर्पण के खिलाफ नीरव मोदी की याचिका पर जानें कानूनी विशेषज्ञों की राय

नीरव को इस साल फरवरी में जिला न्यायाधीश सैम गूजी की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत की प्रत्यर्पण के पक्ष में दी गई व्यवस्था के खिलाफ अपील करने की अनुमति दी गई थी। नीरव के खिलाफ दो मामले हैं।

आखिरी विकल्प है ... प्रत्यर्पण के खिलाफ नीरव मोदी की याचिका पर जानें कानूनी विशेषज्ञों की राय
Ashutosh Rayएएनआई,नई दिल्लीThu, 24 Nov 2022 04:05 PM

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भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने लंदन हाई कोर्ट में एक आवेदन दायर कर अपने भारत प्रत्यर्पण के आदेश के खिलाफ ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की अनुमति मांगी है। कानूनी विशेषज्ञों की मानें तो नीरव मोदी के पास भारत प्रत्यपर्ण से बचने के लिए एकमात्र रास्ता बचा हुआ है और वो है निचली अदालत के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना। जिसकी अनुमति के लिए उसने हाई कोर्ट में आवेदन दिया है।लंदन की हाई कोर्ट ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ऋण घोटाले के मामले में करीब दो अरब डॉलर की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना करने के लिए हाल ही में नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पित करने का आदेश दिया था।

नीरव (51) अभी लंदन के वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। आम जनता के हित से जुड़े कानून के एक बिंदु के आधार पर उसके पास अपील दायर करने के लिए दो सप्ताह का समय है। वकील अर्पित बत्रा ने कहा कि नीरव मोदी के पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना उसके बचने का आखिरी उपाय है। ऐसे में उसे हाई कोर्ट से अनुमति लेनी होगी। उसे यह काम कोर्ट के फैसले के 14 दिन के भीतर करना होगा।

ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट से नीरव मोदी को राहत मिलने पर बत्रा ने कहा, अगर आप हाई कोर्ट के आदेश को देखें तो नीरव के हाथ में ज्यादा कुछ नजर नहीं आता है लेकिन वह फिर भी ऐसा प्रयास कर रहा है। पिछले के किसी भी मामले में आदेश उसके पक्ष में नहीं। वह लंबे समय से जेल में बंद है। उन्होंने कहा कि एक बार जब सुप्रीम कोर्ट से भी नीरव मोदी की अपील खारिज हो जाती है तो संभावना है कि वो यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय का दरवाजा भी खटखटा सकता है। 

छुट्टियों की वजह से भी प्रत्यर्पण में हो सकती है देरी

ब्रिटेन के गृह मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, नीरव को भारत प्रत्यर्पित किए जाने की राह में अब भी कई कानूनी अड़चनें हैं। भारतीय अधिकारियों की ओर से काम कर रही क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) के अब नीरव के नए आवेदन का जवाब देने की उम्मीद है, जिसके बाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश लिखित में फैसला देंगे। क्रिसमस की छुट्टियों की वजह से यह मामला और भी लटक सकता है।

नीरव के मानसिक स्थिति के दावे को कोर्ट ने कर दिया था खारिज

जस्टिस जेरेमी स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस रॉबर्ट जे ने नीरव को भारत प्रत्यर्पित करने का फैसला नौ नवंबर को सुनाया था। अदालत ने मनोरोग विशेषज्ञों के बयान के आधार पर कहा था कि उसे ऐसा नहीं लगता कि नीरव की मानसिक स्थिति अस्थिर है और उसके खुदकुशी करने का जोखिम इतना ज्यादा है कि उसे भारत प्रत्यर्पित करना अन्यायपूर्ण और दमनकारी कदम साबित होगा।

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