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पढ़े-लिखे नौजवानों का आतंकी संगठन IS ऐसे कर रहा ब्रेनवॉश, बिछा रहा है अपना जाल

पढ़े-लिखे नौजवानों को अपने वश में कर रहा IS, ऐसे बिछा रहा अपना जाल (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कुख्यात आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) के निशाने पर देश की राजधानी है। इसके लिए आईएस दिल्ली-एनसीआर में तेजी से अपनी जड़े जमाने में जुटा है। आतंक का सबसे बड़ा आका और आईएस का सरगना अबू बकर अल बगदादी बेशक पिछले करीब साल-डेढ़ साल से लापता और खामोश है, लेकिन आतंक का जो बीज उसने बोया है, उससे अब उसके गुर्गे अब देश की राजधानी दिल्ली में दस्तक देने की कोशिश कोशिश कर रहे हैं। 

हाल फिलहाल में देश की तमाम बड़ी एजेंसियों जैसे एनआईए (NIA) और स्पेशल सेल की टीमों की कार्रवाई से तो यह पूरी तरह से साफ हो गया है। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी एनआईए (नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी) द्वारा दिल्ली और यूपी के ठिकानों पर छापे मारकर की गई दस संदिग्धों की हुई गिरफ्तारी और भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक की बरामदगी से न सिर्फ जांच एजेंसियों की नींद उड़ी है, बल्कि आसपास रहने वाले लोग में सकते में आ गए हैं। आलम यह है कि इलाके में भय का माहौल व्याप्त है और लोग कुछ बोलने से भी परहेज कर रहे हैं।

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संगठन में ऑनलाइन भर्ती का अंदेशा

जांच एजेंसियों के मुताबिक आईएसआईएस इस वक्त ऑनलाइन भर्ती कर रहा था। भर्ती के लिए खासतौर से उन नौजवानों पर उसकी नजर है, जो मूलरूप से जम्मू-कश्मीर के हैं और वे दिल्ली व पश्चिमी यूपी के किसी न किसी संस्थान जुड़कर पढाई कर रहे हैं। संगठन ने अपने इस अभियान के जरिये ही जहां दिल्ली के जामिया मिलिया के पीजी छात्र कश्मीरी मूल के हैरिस मुश्ताक खान को आतंक की दुनिया में पिछले साल ही शामिल कर लिया था, वहीं ग्रेटर नोएडा के शारदा यूनिवर्सिटी के कश्मीरी मूल के छात्र एहतिशाम विलाल को इस साल शामिल कर लिया था।

भर्ती के लिए कैसे करते थे टारगेट

एजेंसियों के मुताबिक आईएसआईएस की भर्ती यूनिट के लोग ये सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर खासतौर पर कश्मीरी मूल के तमाम छात्रों से दोस्ती कर यह देखते थे कि कौन-कौन से लोगों में दहशतगर्दों को लेकर सहानुभूति है। इसके बाद उनसे नजदीकी बढ़ाई जाती थी और फिर उन्हें आतंकियों के प्रति सहानु़भूति पैदा करने वाले साहित्य, वीडियो और ऑडियो भेजे जाते थे। फिर उनके अंदर सुरक्षाबलों के बीच दहशत फैलाने की आग पैदा कर उन्हें अपने संगठन से जोड़ लिया जाता था। 

अवलाकी और अब्दुल्ला की किताबें भेजते थे

जांच एजेंसियों ने यह खुलासा भी किया कि ऑनलाइन भर्ती के दौरान जिस किसी से भी नजदीकी बढ़ती थी, उसे आईएसआईएस की तरफ से अनवर अल अवलाकी और अब्दुल्ला आजम से जुड़ी किताबें और अन्य सामग्री भेजी जाती थी। नौजवानों को जोड़ने के लिए यह कहकर उकसाया जाता था कि इस्लाम खतरें में है और आईएसआईएस उसे बचाने में लगा हुआ है। जैसे ही किसी नौजवान का ब्रेनबॉश हो जाता था, उसे संगठन से जोड़ लिया जाता। 

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  • Web Title:terrorist organisation isis targeting youths through this way