सितंबर से पहले शिक्षक समायोजन पर उठे सवाल
शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षक समायोजन की प्रक्रिया समय से पहले शुरू किए जाने पर सवाल उठने लगे हैं। शिक्षकों का कहना है कि विभाग ने आनन-फानन में समायोजन क

रुद्रपुर, संवाददाता। शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षक समायोजन प्रक्रिया समय से पहले शुरू किए जाने पर शिक्षकों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने से पहले समायोजन करने से विद्यालयों में शिक्षकों की वास्तविक आवश्यकता का सही आकलन नहीं हो सकेगा। शिक्षकों का तर्क है कि पहले यह प्रक्रिया सितंबर के बाद की जाती रही है। शिक्षक नेता हरीश दनाई ने बताया कि 31 मार्च के बाद कक्षा पांच और आठ के विद्यार्थियों के अगले स्तर पर जाने से प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों की छात्र संख्या में बदलाव आता है। अप्रैल से सितंबर तक लगातार नए प्रवेश होने से विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती रहती है।
सितंबर तक प्रवेश प्रक्रिया लगभग पूरी होने पर ही विद्यालयों की वास्तविक छात्र संख्या सामने आती है। उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा छात्र संख्या के आधार पर जल्दबाजी में समायोजन किया गया तो बाद में कई विद्यालयों में शिक्षकों की कमी हो सकती है। इससे शिक्षण व्यवस्था और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका रहेगी। शिक्षकों ने मांग की है कि पूर्व वर्षों की तरह सितंबर के बाद ही वास्तविक छात्र संख्या के आधार पर समायोजन किया जाए, ताकि विद्यालयों में शिक्षकों का संतुलित वितरण सुनिश्चित हो सके। मुख्य शिक्षा अधिकारी हरेन्द्र कुमार मिश्रा ने कहा कि जिले में छात्र संख्या के आधार पर शिक्षक समायोजन की प्रक्रिया चल रही है। शिक्षकों से प्रस्ताव मांगे गए हैं और कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों से समायोजन किया जा रहा है, ताकि सभी विद्यालयों में शिक्षकों का संतुलन बना रहे और शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो।
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