वेतन के अभाव में शिक्षकों की आर्थिक स्थिति बदतर
पचरुखी के नियोजित एवं प्रोन्नति प्राप्त शिक्षकों को पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे उन्हें गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों ने सरकार से बकाया वेतन के भुगतान और बजट स्वीकृति की मांग की है, क्योंकि वेतन न मिलने से कई परिवार तंगहाली की कगार पर पहुँच गए हैं।

पचरुखी, एक संवाददाता। प्रखंड के नियोजित एवं प्रोन्नति प्राप्त शिक्षकों को पिछले दो महीनों से वेतन न मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। वेतन रुकने से शिक्षकों के समक्ष परिवार चलाने और जीवन-यापन की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। शिक्षक नेता जयप्रकाश सिंह के अनुसार, शिक्षकों का वेतन दो मदों जीओबी तथा समग्र शिक्षा से जारी होता है, लेकिन बजट के अभाव में भुगतान पूरी तरह लंबित है। वेतन न मिलने से कई परिवार तंगहाली की कगार पर पहुंच गए हैं। इसके अलावा, अधिकांश शिक्षकों ने विभिन्न बैंकों से ऋण ले रखा है। समय पर वेतन न मिलने से वे बैंक किस्त जमा नहीं कर पा रहे हैं, जिससे बैंक उन पर दबाव बना रहे हैं और वे मानसिक तनाव झेलने को मजबूर हैं।
उन्होंने सरकार की उदासीनता पर रोष व्यक्त करते हुए अविलंब बजट स्वीकृत कर बकाया वेतन भुगतान की मांग की है। वहीं, घनश्याम प्रसाद यादव ने भी इस स्थिति को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए बिहार के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि शिक्षकों का बकाया वेतन शीघ्र उनके खातों में स्थानांतरित किया जाए, ताकि उन्हें इस विषम स्थिति से राहत मिल सके।


