बच्चों के आत्मविश्वास को गढ़ने वाले मूल्यवान स्तम्भ
गौहनिया, हिन्दुस्तान संवाद।शिक्षक दिवस के मौके पर बाल विद्या मंदिर इंटर कालेज करमा में सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर

शिक्षक दिवस के मौके पर बाल विद्या मंदिर इंटर कालेज करमा में सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्कूल के सभागार को गुब्बारों एवं वंदनवारों से सजाया गया। विद्यार्थियों ने भाषण, कविताएं, नृत्य एवं नाट्य प्रस्तुति देकर अपने प्रिय शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में वक्ता
इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि कृषि वैज्ञानिक शशिकांत तिवारी पुरा छात्र ने कहा कि आज के डिजिटल युग में जहां ज्ञान केवल एक क्लिक की दूरी पर उपलब्ध है। वहीं शिक्षक की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। गूगल या एआई जानकारी तो दे सकते हैं, लेकिन नैतिक मूल्य, संकट के समय मार्गदर्शन सिर्फ एक शिक्षक ही दे सकते हैं।। चाहे किसी कमजोर छात्र को देर तक रोककर पढ़ाना हो या आर्थिक रूप से असमर्थ बच्चे का हाथ थामना हो। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा नहीं कराते, बल्कि बच्चे के आत्मविश्वास को गढ़ते भी हैं।
प्रशासकों के विचार
प्रशासक शाहिदा किरमानी ने कहा कि महान दार्शनिक, शिक्षक और भारत के पहले उप-राष्ट्रपति डॉ.राधाकृष्णन का मानना था कि यदि समाज को सशक्त बनाना है तो सबसे पहले शिक्षा को सशक्त बनाना होगा। शिक्षक अच्छे अनुशासन संस्कार और जीवन जीने की सही कला सिखाते हैं। विद्यालय की प्रिंसिपल सबा खान ने कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन किया गया। कार्यक्रम में डा विनोद तिवारी, डा विवेक त्रिपाठी, अल्पना पाठक, सोहा, वसुधा, आफरीदा, विकास यादव सिमरन, काजल आदि उपस्थित रहे।


