शिक्षकों ने कहा- अंग्रेजी नेट का सिलेबस भ्रामक और अस्पष्ट
मेरठ में, एसोसिएशन फॉर इंगलिश स्टडीज ऑफ इंडिया (एईएसआई) ने यूजीसी नेट अंग्रेजी सिलेबस को भ्रामक बताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा है। बृहत स्तर पर छात्रों ने परीक्षा में असंगत कठिन प्रश्नों और अनजाने लेखकों के बारे में सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन ने सिलेबस में स्पष्टता की मांग की है।

मेरठ। प्रतिवर्ष राष्ट्रीय स्तर पर दो बार होने वाली यूजीसी नेट में अंग्रेजी सिलेबस पर शिक्षकों ने सवाल खड़े करते हुए इसे भ्रामक एवं अस्पस्ट करार दिया है। एसोसिएशन फॉर इंगलिश स्टडीज ऑफ इंडिया (एईएसआई) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री और यूजीसी को पत्र लिखते हुए सिलेबस में स्पष्टता की मांग की है। एसोसिएशन ने कहा कि जून 2026 में अंग्रेजी नेट का पेपर देने वाले अभ्यर्थियों के आधार पर वह यह पत्र लिख रहे हैं। एसोसिएशन महामंत्री प्रो. विकास शर्मा के अनुसार जून 2026 में हुई अंग्रेजी की परीक्षा यूजीसी द्वारा तय परीक्षा के पैटर्न से अलग लग रही थी। कई सवाल अस्पष्ट, बहुत ज़्यादा मुश्किल या अंग्रेजी साहित्य के उस शैक्षिक दायरे से बाहर के थे जो आम तौर पर यूजीसी सिलेबस में शामिल होते हैं।
एसोसिएशन के अनुसार बहुत से छात्रों ने शिकायत की कि परीक्षा में ऐसे लेखकों के बारे में सवाल पूछे गए और उनकी रचनाओं को कालक्रम के अनुसार लगाने को कहा गया, जिनके बारे में उन्होंने पहले कभी सुना या पढ़ा नहीं था। एसोसिएशन के मुताबिक यूजीसी नेट का भ्रामक सिलेबस प्रश्नपत्र बनाने वालों को छात्रों की योग्यता परखने के नाम पर कुछ भी और सब कुछ पूछने की छूट देता है। अंग्रेजी साहित्य के छात्रों से यह उम्मीद करना बेहद अतार्किक और अन्यायपूर्ण है कि वे दुनिया के किसी भी हिस्से में लिखी और प्रकाशित होने वाली हर एक साहित्यिक रचना के बारे में जानें। एसोसिएशन के अनुसार समस्या यूजीसी नेट में अंग्रेजी साहित्य के तथाकथित सिलेबस की अस्पष्ट और भ्रामक प्रकृति है। एसोसिएशन ने दिसंबर 2026 परीक्षा के पेपर की आधिकारिक समीक्षा करने की अपील की है। प्रो. विकास शर्मा के अनुसार जून 2025 में अंग्रेजी नेट के पेपर में 150 सवालों में से 67 वही थे, जो 2024 के नेट में पूछे गए थे।
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लेखक के बारे में
Praveen Dixitशॉर्ट बायो : प्रवीण दीक्षित पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान मेरठ में उच्च शिक्षा, मौसम एवं प्रदूषण बीट पर काम कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव
प्रवीण दीक्षित भारतीय मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान में (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) उच्च शिक्षा, मौसम एवं प्रदूषण बीट पर काम कर रहे हैं। 2008 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।
कॅरियर का सफर
प्रवीण दीक्षित ने अपने कॅरियर की शुरुआत 2006 में अमर उजाला अखबार से की। यहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2008 में हिन्दुस्तान के साथ जुड़े। अमर उजाला और हिन्दुस्तान दोनों ही समाचार पत्रों में उन्हें शिक्षा, मौसम और पर्यावरण बीट पर काम करने का मौका मिला। 2008 से वे हिन्दुस्तान में लगातार इन बीट को कवर कर रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
बीएससी बायोलॉजी, बीएड के साथ-साथ हिन्दी और पत्रकारिता में स्नातकोत्तर होने से प्रवीण को विज्ञान, हिन्दी और पत्रकारिता का विशेष संयोजन मिला। इसी वजह से वह शिक्षा, विशेष रूप से उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा पर कमांड के साथ ही इनोवेशन, रिसर्च और डाटा विश्लेषण पर केंद्रित स्टोरीज़ लिख रहे हैं।
उच्च शिक्षा और लक्ष्य
उच्च शिक्षा, मौसम और इससे जुड़े रिसर्च के विषयों पर प्रवीण की गहरी समझ है। उच्च शिक्षा में उन्होंने अनेक एक्सक्लूसिव स्टोरी ब्रेक की हैं। प्रवीण का मानना है कि पत्रकारिता की नींव तथ्यपरकता और विश्वसनीयता के साथ सटीक सूचना देने पर केंद्रित है। इसी को केंद्रित करते हुए उनका लक्ष्य पाठकों को सटीक, प्रमाणिक और सशक्त जानकारी देना है।
विशेषज्ञता
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, शोध, यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई । डाटा विश्लेषण और इस पर केंद्रित समाचार
इनोवेटिव और रिसर्च बेस्ड न्यूज स्टोरीज


