हितों की रक्षा के लिए प्राइमरी शिक्षकों ने पीएम से लगाई गुहार

हिन्दुस्तान, रुद्रपुर
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प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन ने 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए विधायी संरक्षण प्रदान करने और पुरानी पेंशन बहाल करने की गुहार प्रध

हितों की रक्षा के लिए प्राइमरी शिक्षकों ने पीएम से लगाई गुहार

खटीमा, संवाददाता। प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन ने वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए विधायी संरक्षण देने और पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग उठाई है। एसोसिएशन ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम तुषार सैनी को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने 23 अगस्त 2010 को जारी अधिसूचना में शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता के रूप में टीईटी को अनिवार्य किया था। आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के एक सितंबर 2025 और 29 मई 2026 के निर्णयों के बाद वर्ष 2010 से पहले तत्कालीन नियमों और पात्रता मानकों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों पर भी टीईटी की अनिवार्यता लागू हो गई है।

एसोसिएशन का कहना है कि इससे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभ प्रभावित होने की आशंका है। संगठन ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता के मुद्दे पर स्थायी समाधान हेतु विधायी हस्तक्षेप की मांग की। साथ ही सभी शिक्षक-कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की भी मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में शाखा अध्यक्ष कमान सिंह सामंत, जितेंद्र कुमार यादव, राम अचल यादव, भुवन उप्रेती, राजेश जोशी, लक्ष्मण सिंह नेगी, रमेश रावत, मुकेश राना, राकेश राना, हरीश भंडारी, रजनी गंगवार, मीनू दयाल, आशा कोहली, मंजू बिष्ट, गीता पंत और गौरी शंकर जोशी समेत अन्य शिक्षक शामिल रहे।

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