किशनगंज: 100 दिवसीय टीबी स्क्रीनिंग अभियान से तेज हुई टीबी उन्मूलन की मुहिम
अवधेश झा की रिपोर्ट किशनगंज। निज संवाददाता तपेदिक (टीबी) आज भी भारत के

अवधेश झा की रिपोर्ट किशनगंज। निज संवाददाता
तपेदिक (टीबी) आज भी भारत के समक्ष सबसे बड़ी जनस्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके अनेक मरीज लंबे समय तक बिना पहचान के समाज में रहते हैं और अनजाने में संक्रमण का प्रसार करते रहते हैं। ऐसे में समय पर पहचान (अर्ली डिटेक्शन) ही टीबी उन्मूलन की सबसे प्रभावी रणनीति है। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में संचालित 100 दिवसीय टीबी स्क्रीनिंग अभियान को जनभागीदारी, आधुनिक तकनीक और सक्रिय खोज (एक्टिव केस फाइंडिंग) के माध्यम से व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य केवल मरीजों की पहचान करना नहीं, बल्कि संक्रमण की श्रृंखला को समय रहते तोड़कर टीबी मुक्त भारत के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करना है। जिला पदाधिकारी नवीन कुमार स्वयं प्रतिदिन अभियान की प्रगति की समीक्षा कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं, जिससे अभियान को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाया जा सके。
मंडल कारा में हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन से बंदियों की टीबी स्क्रीनिंग शुरू
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत बुधवार को मंडल कारा में विशेष टीबी स्क्रीनिंग शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी ने अल्ट्रा पोर्टेबल हैंडहेल्ड डिजिटल एक्स-रे मशीन की कार्यप्रणाली की विस्तार से जानकारी ली तथा इसके माध्यम से बंदियों की त्वरित और सटीक जांच की प्रक्रिया का अवलोकन किया। उन्होंने मंडल कारा का निरीक्षण भी किया तथा स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि प्रत्येक बंदी की गुणवत्तापूर्ण स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी संभावित टीबी रोगी की समय रहते पहचान कर उसका तत्काल उपचार प्रारंभ किया जा सके।शिविर के दौरान मंडल कारा में निरुध्द सभी बंदियों की हैंडहेल्ड डिजिटल एक्स-रे मशीन के माध्यम से टीबी स्क्रीनिंग की जा रही है। जिन बंदियों के एक्स-रे में किसी प्रकार की असामान्यता पाई जाएगी, उनके बलगम के नमूने लेकर ट्रूनाट (एनएएटी) जांच के लिए भेजे जाएंगे। जांच में टीबी की पुष्टि होने पर संबंधित बंदियों को राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाएगा तथा संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय भी किए जाएंगे।इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी, जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ मंजर आलम, यक्ष्मा कार्यक्रम के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा मंडल कारा के जेलर सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।
100 दिवसीय अभियान में स्क्रीनिंग ने पकड़ी रफ्तार
100 दिवसीय टीबी स्क्रीनिंग अभियान के अंतर्गत 20 जुलाई 2026 तक जिले में निर्धारित 4,74,720 स्क्रीनिंग लक्ष्य के विरुद्ध 3,20,273 (67 प्रतिशत) लोगों की स्क्रीनिंग पूरी की जा चुकी है। अभियान के दौरान 15,566 डिजिटल एक्स-रे तथा 3,734 एनएएटी (ट्रूनाट/मॉलिक्यूलर) जांच की गई हैं। इन जांचों के आधार पर 718 नए टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ा गया है। इसके अलावा 2,064 पात्र व्यक्तियों को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) प्रदान किया गया है तथा 585 मरीजों की निक्षय प्रणाली में डीटीसी अपडेट की गई है।
हर संदिग्ध व्यक्ति तक जांच पहुंचाना अभियान की प्राथमिकता
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी ने बताया कि जिन लोगों को दो सप्ताह या उससे अधिक समय से खांसी, लगातार बुखार, वजन में कमी, भूख न लगना अथवा रात में अत्यधिक पसीना आने जैसे लक्षण हों, वे बिना किसी झिझक के निकटतम सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में टीबी की जांच कराएं। सरकार द्वारा हैंडहेल्ड डिजिटल एक्स-रे, ट्रूनाट सहित सभी आवश्यक जांच एवं उपचार पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।
समय पर पहचान से ही जीती जाएगी टीबी के खिलाफ लड़ाई
सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि टीबी के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार समय पर पहचान, शीघ्र उपचार और समुदाय की सक्रिय भागीदारी है। विद्यालयों, मंडल कारा, उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों तथा समुदाय स्तर पर चलाए जा रहे विशेष स्क्रीनिंग शिविरों के माध्यम से संभावित मरीजों की सम…


