टाटा स्टील झारखंड में 10 हजार करोड़ करेगी निवेश : चैतन्य भानु
टाटा स्टील ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर समारोह आयोजित किया। कंपनी झारखंड में 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। इसका फोकस ग्रीन स्टील उत्पादन और एआई तकनीक पर है। प्लांट में 800 से अधिक एआई मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे 2 हजार रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर शनिवार को टाटा स्टील ने वर्क्स जनरल ऑफिस के पास भव्य समारोह आयोजित किया। कंपनी के उपाध्यक्ष (ऑपरेशंस) चैतन्य भानु ने ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट कहा कि टाटा स्टील का जमशेदपुर प्लांट आने वाले दिनों में सिर्फ स्टील उत्पादन का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक से संचालित एक आधुनिक प्लांट के रूप में नजर आएगा। उन्होंने बताया कि कंपनी झारखंड में विभिन्न परियोजनाओं पर करीब 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। इस निवेश का मुख्य फोकस उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ग्रीन स्टील, सुरक्षा व्यवस्था और डिजिटल तकनीक पर है। कंपनी का लक्ष्य भारतीय परिचालन की वर्तमान क्षमता 27.35 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) को बढ़ाकर 40 एमटीपीए करना है। इस विस्तार से करीब दो हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। नई तकनीक के संचालन के लिए कर्मचारियों को देश-विदेश में प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। वे शनिवार को कंपनी वर्कस मेन गेट पर झंडोत्तोलन समारोह के बाद आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। मौके पर कंपनी के वरीय अधिकारियों के अलावा यूनियन नेता और शहर के गणमान्य लोग उपस्थित थे.
मशीन कब खराब होगी, एआई पहले बताएगा
वीपी ने कहा कि प्लांट की अधिकांश मशीनों में एडवांस सेंसर लगाए जा चुके हैं। इन सेंसर से मशीन के वाइब्रेशन और उसकी कार्यक्षमता की लाइव जानकारी मिल रही है। मेंटेनेंस टीम मोबाइल से ही मशीन की 'सेहत' देख सकती है। इससे खराबी आने से पहले ही उसका पता लगाकर मेंटेनेंस किया जा रहा है और अचानक होने वाले ब्रेकडाउन में कमी आई है। सिंटर और पेलेट प्लांट समेत कई हिस्सों को रिमोट कंट्रोल रूम से संचालित किया जा रहा है।
800 से ज्यादा एआई मॉडल बताएंगे खतरे का अंदाजा
सुरक्षा को लेकर कंपनी ने एआई आधारित सिस्टम का बड़े स्तर पर इस्तेमाल शुरू किया है। प्लांट में 800 से अधिक एआई मॉडल और एल्गोरिदम का उपयोग किया जा रहा है। इनका उद्देश्य संभावित सुरक्षा जोखिमों की पहले पहचान करना है, ताकि हादसा होने से पहले ही उसे रोका जा सके। यानी अब निगरानी केवल हादसे के बाद जांच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तकनीक संभावित खतरे का पहले ही संकेत देगी।
ग्रीन स्टील के लिए 7 हजार करोड़ की बड़ी परियोजना
कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए कंपनी हिसरना और इजीमेल्ट जैसी तकनीकों पर काम कर रही है। जमशेदपुर में करीब 1 मिलियन टन क्षमता का हिसरना पायलट प्लांट लगाने की योजना है। कंपनी के अनुसार इससे कार्बन उत्सर्जन में करीब 20% तक कमी लाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही भारतीय कोकिंग कोल के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर है। टिनप्लेट में नई लाइन और कॉम्बी मिल के विस्तार समेत अन्य परियोजनाओं पर भी बड़ा निवेश किया जा रहा है।
दोपहिया वाहनों के प्रवेश पर भी लग सकती है रोक
प्लांट में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए टू-व्हीलर के प्रवेश को चरणबद्ध तरीके से बंद करने की तैयारी है। इसके लिए अध्ययन शुरू हो चुका है। कंपनी का तर्क है कि प्लांट की सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने और सड़क की सीमित चौड़ाई के कारण दोपहिया वाहनों से सुरक्षा जोखिम पैदा होता है। हालांकि, इसे लागू करने से पहले कर्मचारियों और यूनियन प्रतिनिधियों से बातचीत की जा रही है, ताकि वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर सहमति बनाई जा सके.
2 हजार रोजगार के अवसर भी बनेंगे
इन परियोजनाओं से करीब 2 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। नई तकनीक के संचालन के लिए कर्मचारियों को देश-विदेश में प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यानी टाटा स्टील में आने वाले बदलाव का असर केवल मशीनों और उत्पादन तक नहीं, बल्कि कर्मचारियों के काम करने के तरीके और उनकी नई तकनीकी दक्षता पर भी पड़ेगा। खास बात यह है कि टाटा स्टील का अगला बड़ा बदलाव केवल ज्यादा स्टील बनाने का नहीं, बल्कि कम कार्बन, ज्यादा सुरक्षित और एआई आधारित प्लांट तैयार करने का है।


