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दोबारा नहीं होगा कैंसर? डॉक्टरों ने खोज निकाला इलाज; सिर्फ 100 रुपये है कीमत

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) के डॉक्टरों और शोधकर्ताओं ने दावा किया कि उन्होंने एक ऐसा टैबलेट विकसित किया है जो कैंसर से ठीक हो चुके लोगों को दोबारा कैंसर होने से रोक सकता है।

दोबारा नहीं होगा कैंसर? डॉक्टरों ने खोज निकाला इलाज; सिर्फ 100 रुपये है कीमत
Himanshu Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,मुंबईWed, 28 Feb 2024 10:43 PM
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दुनियाभर में कैंसर लाखों लोगों की जान लेता है। कैंसर का नाम सुनते ही ऐसा महसूस होता है जैसे कोई मौत के कगार पर हो। कैंसर के इलाज के लिए लाखों खर्च करने पड़ते हैं लेकिन बचने की उम्मीद न के बराबर होती है। मगर हाल ही में कैंसर की बीमारी का तोड़ निकालने के लिए डॉक्टरों और शोधकर्ताओं ने एक अच्छी खबर दी है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) के डॉक्टरों और शोधकर्ताओं ने दावा किया कि उन्होंने एक ऐसा टैबलेट विकसित किया है जो कैंसर से ठीक हो चुके लोगों को दोबारा कैंसर की चपेट में आने से रोक सकता है।

10 साल तक चला शोध
इकोनॉमिक्स टाइम्स के मुताबिक, शोधकर्ताओं और डॉक्टरों ने बताया कि दस साल तक कई शोध करने के बाद आखिरकार उन्होंने यह टैबलेट बनाया है। टीआईएफआर के शोधकर्ताओं ने कहा है कि यह टैबलेट न केवल दूसरी बार कैंसर होने से रोकता है बल्कि रेडिएशन और कीमोथेरेपी से होने वाले दुष्प्रभावों को भी कम करेगा। वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. राजेंद्र बडवे ने इस टैबलेट के बारे में कहा, "इस टैबलेट की खोज के लिए कई शोधकर्ताओं और डॉक्टरों ने दस साल तक कड़ी मेहनत की। विशेषज्ञों ने शोध के लिए मानव कैंसर कोशिकाओं को चूहों में डाला है। फिर चूहे का इलाज कीमोथेरेपी, रेडिएशन और सर्जरी से किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ समय बाद कैंसर कोशिकाएं मर गईं और छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट गईं जिन्हें 'क्रोमैटिन कण' कहा जाता है।"

दोबारा कैंसर होने से रोकेगा यह टैबलेट
बडवे ने आगे कहा, "शोधकर्ताओं ने चूहों को दूसरी बार कैंसर होने की संभावना को कम करने के लिए रेस्वेराट्रॉल और कॉपर (R+Cu) युक्त प्रो-ऑक्सीडेंट गोलियां दीं। शोध से पता चला है कि कॉपर (R+Cu) ऑक्सीजन रेडिकल्स पैदा करता है और क्रोमैटिन कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह टैबलेट कैंसर के इलाज के दुष्प्रभावों को 50 प्रतिशत तक कम कर देता है और दोबारा कैंसर को रोकने में 30 प्रतिशत तक प्रभावी है। लेकिन अगर इस टैबलेट को बाजार में लाना है तो इसे भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से मंजूरी लेनी होगी।"

कब बाजार में आएगा यह टैबलेट
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च का कहना है कि उनके द्वारा खोजा गया यह टैबलेट जून-जुलाई में बाजार में आने की संभावना है। यह टेबलेट कई कैंसर पीड़ितों के लिए वरदान बनेगा। एक वरिष्ठ कैंसर सर्जन का कहना है कि यह टैबलेट कैंसर के इलाज को बेहतर बनाने में काफी मददगार साबित होगा। जहां कैंसर के इलाज में लाखों खर्च करने पड़े वहीं कंपनी के शोधकर्ताओं का कहना है कि यह टैबलेट महज 100 रुपये में उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह गरीबों के लिए काफी उपयोगी होगा। अगर यह टैबलेट बाजार में उपलब्ध हो जाता है तो यह टाटा इंस्टीट्यूट के लिए बड़ी सफलता होगी।

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