अमृता की मौत मामले में पुलिस अब वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्य जुटा रही
मुजफ्फरपुर में अमृता की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों को जमा कर रही है। गिरफ्तार बीडीओ और महिला दारोगा के मोबाइल फोन को जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद से डिलीट की गई चैट और कॉल डिटेल्स की जांच कर रही है।

मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। अमृता की संदिग्ध स्थिति में मौत के मामले में मिठनपुरा पुलिस अब वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों को कलेक्ट कर रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले की परतें इंसानी गवाही से ज्यादा पुख्ता तरीके से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य ही खोलेंगे। यही वजह है कि गिरफ्तार जाले बीडीओ मनोज कुमार और उनकी कथित प्रेमिका महिला दारोगा के पास से जब्त किए गए मोबाइल फोन को जांच के लिए एफएसएल भेजा गया है。
तथ्य और सबूतों की जांच
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी से ऐन पहले महिला दारोगा ने अपने मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण डेटा और सोशल मीडिया चैट्स को उड़ाने की कोशिश की थी। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी के कारण वह अपनी इस साजिश में सफल नहीं हो सकी। अब पुलिस फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद से दोनों आरोपियों के फोन का डीप-डेटा एक्सट्रैक्शन कराएगी। इससे वाट्सएप, इंस्टाग्राम या अन्य मैसेंजर ऐप्स से डिलीट की जा चुकी चैट, तस्वीरें और वॉयस नोट्स को दोबारा रिकवर किया जा सकेगा। पुलिस की दूसरी सबसे बड़ी नजर कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और आईपी लॉग्स पर है। पुलिस यह पता लगा रही है कि घटना वाले दिन और उससे ठीक पहले, दोनों आरोपियों के बीच कितनी बार और कितनी देर बातचीत हुई। दोनों के मोबाइलों का टावर लोकेशन भी खंगाला जा रहा है। मायके वालों का आरोप है कि घटना के दिन भी प्रेमिका दारोगा बीडीओ से मिलने पटना गई थी।
कैसे आगे बढ़ रही है जांच
बेला मोड़ स्थित आवास के सीसीटीवी कैमरों के डिजिटल सिग्नल्स की भी पड़ताल की जा रही है, जिसका एक्सेस अमृता के भी मोबाइल में था। इधर, मिठनपुरा थानेदार अजय कुमार ने बताया कि मामले में हर एक बिंदुओं पर जांच कर जानकारी जुटाई जा रही है। मामले में फरार आरोपितों की भी तलाश की जा रही है।


