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फैसला : पति की गलती से शादी टूटी तो देना होगा गुजारा भत्ता

उच्चतम न्यायालय ने एक फैसले में व्यवस्था दी है कि यदि पति की शारीरिक खामी या गलती की वजह से विवाह विच्छेद होता है तो उसे पत्नी के गुजारे के लिए भत्ता देना होगा। यह भत्ता तब तक देना होगा, जब तब पत्नी दोबारा विवाह न कर ले। जस्टिस आर भानुमति और एएस बोपन्ना की पीठ ने शुक्रवार को केरल उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर पति की याचिका खारिज करते हुए यह निर्णय सुनाया। पीठ ने कहा कि पति को सीआरपीसी की धारा-125 के तहत पत्नी को गुजारा भत्ता देना होगा, क्योंकि उसने दोबारा शादी नहीं की है।

पति का कहना था कि शादी उसने समाप्त नहीं की है। इस मामले में पत्नी ने ही विवाह विच्छेद के लिए याचिका दायर की थी। वहीं, यह शादी अब समाप्त हो गई है और वह उसकी पत्नी नहीं है। ऐसे में गुजार भत्ता देने का आदेश देना गलत है।

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हालांकि शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले में पति ने यह तथ्य छिपाया कि वह नपुंसक है। इसमें पत्नी की कोई गलती नही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में विवाह समाप्त होने का तथ्य महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि विवाह किन परिस्थितियों में समाप्त हुआ। 

क्या था मामला
टीके सुधीरन नाम के शख्स ने नजीमा से विवाह किया था। नजीमा को कुछ दिन बाद पति की इस शारीरिक अक्षमता का पता चला तो वह उसका घर छोड़कर अलग रहने लगी। साथ ही धारा-125 के तहत गुजारा भत्ता मांगा। इसके खिलाफ पति ने अदालत में अर्जी दायर की और कहा कि पत्नी बिना किसी कारण के उससे अलग रह रही है। ऐसे में वह उसे गुजारा भत्ता क्यों दे। 

जिला अदालत से झटका
जिला जज ने मामले की जांच करवाई और पाया कि सुधीरन ने नपुंसकता की बात छिपाकर विवाह किया है। इसके बाद जज ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-12 के तहत शादी को समाप्त कर दिया। साथ ही आदेश दिया कि सुधीरन पत्नी को एक हजार रुपये प्रति माह का गुजारा भत्ता दे। पति ने इस आदेश को पहले उच्च न्यायालय और फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनाती दी, लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली।

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  • Web Title:Supreme Court Verdict Over Wife Sustenance Allowance If Marriage Break Due To Husband Fault