हमें बढ़ते बच्चों के सेहत की चिंता है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे लोगों, खासकर बढ़ते बच्चों की सेहत की चिंता है। कोर्ट ने खाद्य सुरक्षा से जुड़े सभी लोगों से ज्यादा नमक, चीनी और फैट वाले उत्पादों के पैकेज पर चेतावनी लेबल लगाने की अपील की है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि उसे लोगों, खासकर बढ़ते बच्चों की सेहत की चिंता है। कोर्ट चाहता है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े सभी लोग ज्यादा नमक, चीनी और फैट वाले पैकेज्ड उत्पाद पर सामने की तरफ चेतावनी वाले लेबल लगाने के मुद्दे पर ‘राष्ट्रीय हित’ में विचार करें। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि वह इस ‘गंभीर मामले’ पर हितधारक से कुछ जानकारी मांगने के लिए एक विस्तृत आदेश जारी करेगी। पीठ ने कहा कि हमें सिर्फ लोगों, खासकर बढ़ते बच्चों की सेहत की चिंता है। हम चाहते हैं कि सभी संबंधित लोग राष्ट्रीय हित में इस मामले पर विचार करें। साथ ही, पीठ ने संकेत दिया कि आदेश एक-दो दिन में अपलोड कर दिया जाएगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि उसने भी इस मुद्दे पर कुछ तैयारी की है और पक्षों से कहा है कि वे अपलोड होने वाले आदेश का अध्ययन करें। साथ ही, मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर के लिए तय कर दी। पीठ एक ट्रस्ट ‘3एस एंड अवर हेल्थ सोसाइटी’ की याचिका पर हुई संक्षिप्त सुनवाई की。
क्या एफएसएसएआई ने कोई गाइडलाइन बनाई है?
पीठ ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) से कहा कि पैकेज्ड फूड उत्पादों में सामग्री की जानकारी हमेशा पैकेट के पीछे होती है, लेकिन क्या अथॉरिटी ने कोई गाइडलाइन बनाई है कि अगर सामग्री इस सीमा से ज्यादा हो, तो उसे ज्यादा चीनी, नमक या फैट वाला माना जाए?
अल्ट्रा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के लिए अलग रंग हो
मामले में शामिल होने वाले पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कहा कि सरकार ‘कुरकुरे’ स्नैक प्रोडक्ट को अंडे और नमकीन काजू जैसे पौष्टिक भोजन के बराबर ही मान रही है। उन्होंने कहा कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर ज्यादा कड़ी चेतावनी होनी चाहिए। जैसे वेज और नॉनवेज के लिए हरा और लाल होता है उसी तरहा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के लिए अलग रंग का इस्तेमाल हो सकता है। पीठ ने कहा कि वह इस संबंध में एक दो दिनों में एक आदेश जारी करेगी。


