‘पद रिक्त होने से किसी भी ट्रिब्यूनल का काम ठप न हो’

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा है कि वह न्यायाधिकरणों के सदस्यों के खाली पदों के कारण कामकाज ठप न होने दे। अदालत ने सुझाव दिया कि सरकार मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल अस्थायी रूप से बढ़ाने पर विचार करे। मुख्य न्यायाधीश ने सुनिश्चित किया कि नई नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू की गई है।

‘पद रिक्त होने से किसी भी ट्रिब्यूनल का काम ठप न हो’

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सदस्यों के पद रिक्त रहने के चलते किसी भी न्यायाधिकरण का कामकाज ठप नहीं हो। शीर्ष अदालत ने सरकार को न्यायाधिकरणों में नई नियुक्तियां होने तक अस्थाई तौर पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाने पर विचार करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह निर्देश तब दिया, जब ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरएटी) कलकत्ता बार एसोसिएशन की ओर से दाखिल अर्जी का उल्लेख किया। अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि अर्जी डीआरएटी कलकत्ता पीठ के पीठासीन सदस्य की आसन्न सेवानिवृत्ति से संबंधित है, जिसे तत्काल सूचीबद्ध करने और सुनवाई की जरूरत है।

पीठ को बताया गया कि यदि पीठासीन सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं तो यहां कामकाज ठप हो सकता है। केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने पीठ से कहा कि न्यायाधिकरणों में रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सरकार से जानना चाहा कि क्या वह ट्रिब्यूनल के कामकाज में निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा अस्थाई व्यवस्था को एक माह या उससे अधिक समय के लिए बढ़ा सकता है? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सरकार अपनी तरफ से यह फैसला ले सकती है कि मौजूदा अस्थाई व्यवस्था को एक माह या अधिक समय के लिए बढ़ाएगी? पीठ ने कहा कि अदालत यह साफ करेगा कि सदस्यों का कार्यकाल का विस्तार सिर्फ ‘कामचलाऊ प्रबंध’ हैं, जिसमें सदस्यों को कोई खास अधिकार नहीं दिए गए हैं।मुख्य न्यायाधीश ने सरकार से कहा कि आपको हमें यह पक्का भरोसा देना होगा कि रिक्तियां भरी जाएंगी। जैसे ही हम इन याचिकाओं का निपटारा करेंगे और अगर 2 या 3 महीने में नई नियुक्ति नहीं होती है, तो मुकदमे का दूसरा राउंड शुरू हो जाएगा। इस पर अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणी ने पीठ से केंद्र सरकार इस सुझाव पर गौर करेगा, लेकिन अनुरोध किया कि मामले को नए अधिनियमित ट्रिब्यूनल सुधार अधिनियम 2026 के आलोक में समाप्त कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नए कानून में जरूरी व्यवस्थाएं प्रदान की गई हैं और प्रक्रिया पहले से ही चल रही है। पीठ ने कह कि हम नहीं चाहते कि न्यायाधिकरण निष्क्रिय हो जाएं और संकेत दिया कि मौजूदा व्यवस्था नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने तक तदर्थ आधार पर जारी रह सकती है।

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