सामान्य श्रेणी में चयनित आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार आरक्षित श्रेणी में बेहतर पद पाने का हकदार- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि आरक्षित श्रेणी का प्रतिभागी सामान्य श्रेणी में चयनित हो जाता है और उसने अधिक अंक प्राप्त किए हैं, तो उसे बेहतर पद पाने का अधिकार है। कोर्ट ने झारखंड उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए यह आदेश दिया।

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आरक्षित श्रेणी का कोई प्रतिभागी जो हर तरह से योग्य है और मेरिट के आधार पर सामान्य श्रेणी में चयनित हुआ है, उसे आरक्षित श्रेणी के उस उम्मीदवार की तुलना में बेहतर पद पाने का हक है जिसने कम अंक हासिल किए हैं। शीर्ष अदालत ने कानून के स्थापित सिद्धांत और पूर्व के फैसलों का हवाला देते यह टिप्पणी की है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
जस्टिस एमएम सुंदरेश और पीबी वराले की पीठ न झारखंड उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील पर विचार कर रही है। उच्च न्यायालय ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित 6ठी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में सामान्य श्रेणी में चयनित आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों की उस मांग को ठुकरा दिया था, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार/ जेपीएससी को झारखंड प्रशासनिक सेवा आवंटित करने का निर्देश देने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि भले ही उन्होंने अधिक अंक हासिल किए थे और सामान्य श्रेणी में चुने गए थे, उन्हें अन्य सेवाएं आवंटित की गईं, जबकि आरक्षित श्रेणी के जिन उम्मीदवारों ने कम अंक हासिल किए थे, उन्हें झारखंड प्रशासनिक सेवा आवंटित की गई। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि ‘मुख्य मुद्दे पर कानून बिल्कुल स्पष्ट है और इस अदालत ने कई फैसलों में इसे दोहराया है, जिसमें सबसे हालिया फैसला ‘भारत सरकार बनाम रमेश राम और अन्य’ एक बड़ी पीठ का था। पीठ ने कहा कि ‘इस नजरिए से, यह कहने में कोई परेशानी नहीं है कत कोई व्यक्ति जो आरक्षित श्रेणी के तहत योग्य है और सामान्य श्रेणी में चुना गया है, वह आरक्षित श्रेणी के उस व्यक्ति की तुलना में बेहतर पद पाने का हकदार है जिसने उससे कम अंक हासिल किए हैं।’
सरकारी हलफनामा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार और अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अपीलकर्ताओं ने असल में छूट का लाभ उठाया है। हालांकि हमें इस बात को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं मिला है। शीर्ष अदालत ने अब इस बारे में सरकार और अन्य प्रतिवादियों को छह सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिया है। इसके अलावा, शीर्ष अदालत ने कहा है कि ‘एक और मुद्दा उन अनारक्षित उम्मीदवारों की स्थिति का है, जब कोई आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार, जो अनारक्षित श्रेणी में चला गया था, अपनी पसंद की आरक्षित पोस्ट पर वापस लौटता है, इस बारे में भी सरकार को स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।
याचिकाकर्ताओं की मांग
उच्च न्यायालय के समक्ष चंदन सहित 4 उम्मीदवारों ने याचिका दाखिल कर राज्य सरकार और जेपीएससी को उन्हें प्रशासनिक सेवा आवंटित करने का आदेश देने की मांग की थी। सामन्य श्रेणी में चयनित हुए आरक्षित श्रेणी के इन उम्मीदवारों का कहना था कि उनसे कम अंक लाने लाने वाले को बेहतर पद मिला है, इसलिए उन्हें आरक्षित श्रेणी में प्रशासनिक सेवा का पद दिया जाए।


