मध्यस्थता और सुलह से होगा विवादमुक्त समाज का निर्माण : न्यायमूर्ति विक्रम नाथ
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में उच्चतम न्यायालय की मध्यस्थता और सुलह परियोजना समिति द्वारा शिक्षकों के लिए पांच दिनी प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। 52 शिक्षकों ने इसमें भाग लिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये प्रशिक्षण समाज में विवादों के समाधान में मदद करेंगे। कुलपति ने समस्याओं को नए तरीकों से हल करने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रयागराज, कार्यालय संवाददाता। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में उच्चतम न्यायालय की मध्यस्थता और सुलह परियोजना समिति (एमसीपीसी) की ओर से शिक्षकों के लिए आयोजित पांच दिनी मीडिएशन एंड कॉन्सिलिएशन (मध्यस्थता और सुलह) प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शनिवार को हुआ। प्रशिक्षण में 52 शिक्षकों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण के महत्व
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि एमसीपीसी समाज के सभी वर्गों के प्रतिनिधियों को मीडिएशन और कॉन्सिलिएशन का प्रशिक्षण दे रही है। प्रशिक्षण प्राप्त गैर-वकील भी मीडिएशन प्रक्रिया में सहयोग कर सकेंगे। इससे समाज में विवादों के समाधान और विवादमुक्त समाज के निर्माण में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट भी इन प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों से आवश्यकता के अनुसार सहयोग लेगा। 25 से अधिक पंजीकरण होने पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पुनः प्रशिक्षण करवाया जाएगा।
समाज में सुधार
कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने कहा कि सामाजिक टकराव का प्रबंधन सुशासन का हिस्सा है। समस्याओं को समझदारी और नए तरीके से हल करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विजेता नया काम नहीं करता, बल्कि उसी काम को नए तरीके से करके आगे बढ़ता है। प्रशिक्षण से शिक्षकों को दैनिक जीवन की समस्याओं के समाधान में भी मदद मिलेगी।
कार्यक्रम की औपचारिकताएं
संचालन एस सुशीला, विजयकमला, एएन भट्ट और पीताम्बर आर अभीचंदानी ने किया। नोडल अधिकारी प्रो. सोनल शंकर ने अतिथियों और प्रशिक्षकों के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम में कुलसचिव प्रो. आशीष खरे, प्रो. आदेश कुमार, प्रो. अंशुमान मिश्र आदि मौजूद रहे।


