Supreme Court today refused urgent hearing to challenging Islamic practice of polygamy and Nikah Halala - निकाह हलाला को चुनौती देने वाली याचिका पर SC का तुरंत सुनवाई से इंकार DA Image
14 दिसंबर, 2019|5:21|IST

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निकाह हलाला को चुनौती देने वाली याचिका पर SC का तुरंत सुनवाई से इंकार

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सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिमों में प्रचलित निकाह हलाला और बहुविवाह प्रथाओं को चुनौती देने वाली याचिका की त्वरित सुनवाई से सोमवार को इंकार कर दिया। याचिकाकर्ता भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष मामले का विशेष उल्लेख किया और त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया। न्यायमूर्ति बोबडे ने उनका अनुरोध ठुकराते हुए कहा कि वह मामले की सुनवाई अदालत में सर्दियों की छुट्टियों के बाद करेंगे। उपाध्याय ने एक जनहित याचिका दायर करके मुस्लिमों में प्रचलित निकाह हलाला और बहुविवाह प्रथाओं को असंवैधानिक करार देने की मांग की है।

आपको बता दें कि निकाह हलाला के तहत एक व्यक्ति अपनी पूर्व पत्नी से तब तक दोबारा शादी नहीं कर सकता ... जब तक कि वह महिला किसी अन्य पुरूष से शादी कर उससे शारीरिक संबंध नहीं बना लेती और फिर उससे तलाक लेकर अलग रहने की अवधि (इद्दत) पूरा नहीं कर लेती। 

जबरन हलाला करना बलात्कार के समान : दारुल उलूम वक्फ

अपनी पत्नियों को तलाक देने के बाद जबरन उनका हलाला कराए जाने के लिए दबाव बनाने के मामले को दारुल उलूम वक्फ के उलेमा ने इस्लाम के खिलाफ बताया। उलेमा-ए-कराम ने कहा कि निकाह महिलाओं की इच्छा पर होता है और उसे किसी पर जबरन नहीं थोपा जा सकता। उलेमा ने शरीयत के हवाले से बताया कि जबरन या किसी शर्त के साथ हलाला कराना बलात्कार के समान नाजायज है। 

बुलंदशहर के गांव अकबरपुर में दो बहनों के साथ दो भाइयों का निकाह हुआ था। इसके बाद बीते 20 अक्तूबर को विवाहिताओं के पतियों ने उन्हें तलाक दे दिया। इसके बाद से वह उन पर हलाला के लिए दबाव बना रहे हैं और न करने पर धमकी दे रहे हैं। दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मुफ्ती आरिफ कासमी ने बताया कि दबाव बनाकर हलाला कराना नाजायज है।

उन्होंने कहा कि विवाह के लिए निकाह लड़कियों की मर्जी से होता है। उसे यह अधिकार होता है कि वह हां कहें या इंकार करें। कुछ लोग गलत तरीके से हलाला शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। कासमी ने कहा कि किसी शर्त के साथ हलाला हो ही नहीं सकता। हलाला की व्याख्या करते हुए बताया इससे साफ है कि दूसरा निकाह करना है।

यदि दूसरा निकाह इस शर्त के साथ किया जाए कि दूसरे पति से तलाक लेकर पहले पति से पुन: विवाह किया जाए तो हराम है। उन्होंने कहा कि यह तो संभंव है कि दूसरे पति से मनमुटाव या उसकी मृत्यु के बाद पहले पति से निकाह कर लिया जाए, मगर तलाक की शर्त के साथ दूसरा निकाह नहीं किया जा सकता। 

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