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राजद्रोह की संवैधानिक वैधता के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अब 27 जुलाई को करेगा सुनवाई

राजद्रोह की संवैधानिक वैधता के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अब 27 जुलाई को करेगा सुनवाई

संक्षेप:

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को दो हफ्तों का समय देते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (राजद्रोह) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित की दी।...

Jul 12, 2021 10:21 pm ISTDeepak Mishra अब्राहम थॉमस,
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को दो हफ्तों का समय देते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (राजद्रोह) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित की दी। मामले में अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी। धारा 124ए के तहत राज्य या केंद्र सरकार के खिलाफ आलोचनात्मक टिप्पणियों को नफरत फैलाने वाला अवमानना वाला बताकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। धारा 124ए के तहत अधिकतम आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। 1962 में सुप्रीम कोर्ट ने केदारनाथ यादव बनाम बिहार मामले में इस कानून को संवैधानिक मान्यता दी थी। 

इस साल 30 अप्रैल को शीर्ष कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। यह नोटिस मणिपुर और छत्तीसगढ़ में काम कर रहे दो पत्रकारों, किशोरचंद्र वांगखेमचा और कन्हैया लाल शुक्ला की याचिका पर दिया था। इन दोनों ने सुप्रीम कोर्ट से 1962 के फैसले का पुनरीक्षण करने की अपील की थी। इनके मुताबिक इस कानून की आड़ में सरकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत मिले अभिव्यक्ति की आजादी के मौलिक अधिकार का हनन कर रही है। कोर्ट ने इस मामले में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की मदद भी मांगी है। सोमवार को जस्टिस यूयू ललित और अजय रस्तोगी की बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को दो हफ्ते का समय दिया। उनसे कहा गया है कि अगली सुनवाई से पहले वह केंद्र के पक्ष में हलफनाम प्रस्तुत करे। कोर्ट ने मामले में अटॉर्नी जनरल से भी लिखित में पक्ष रखने को कहा है।

इस बीच मामले में तीन अन्य आवेदन कोर्ट को मिले हैं। यह आवेदन फाउंडेशन आफ मीडिया प्रोफेशनल्स, पत्रकार शशि कुमार और लॉ प्रोफेसर संजय एस जैन की तरफ से दिए गए हैं। इन सभी धारा 124ए के खिलाफ दायर की गई याचिका को समर्थन दिया है। फाउंडेशन आफ मीडिया प्रोफेशनल्स की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार पेश हुए वहीं अन्य दो आवेदकों की तरफ से नमित सक्सेना मौजूद रहे। फाउंडेशन के मुताबिक मौजूदा समय में इंटरनेट संचार के माध्यमों में क्रांतिकारी बदलाव कर दिए हैं।

वहीं इसने सरकारों को आम नागरिकों के विचारों, बातों और भाषणों पर अंकुश लगाने में भी सक्षम बना दिया है। शशि कुमार ने अपने आवेदन में कहा कि धारा 124 ए के अस्पष्ट प्रावधानों के चलते इसे फ्री स्पीच के खिलाफ एक राजनैतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने एंटी-सीएए के खिलाफ धरना देने वालों और किसानों पर राजद्रोह के मुकदमे लगाने के मामलों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की आलोचनात्मक नारेबाजी पर, सकारात्मक आलोचना के जुड़ा कंटेंट पोस्ट करने पर, सरकारों को खुला पत्र लिखने पर और यहां तक कि गैर—भारतीय टीमों के जीत पर जश्न मनाने पर भी धारा 124ए के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया जा रहा है। 

वहीं तीसरे आवेदक ने दिखाया कि वैश्विक स्तर पर लंदन और न्यूजीलैंड ने राजद्रोह कानूनों को रद्द कर दिया है। जबकि आस्ट्रेलिया ने 2010 में राजद्रोह शब्द की जगह हिंसात्मक अपराध का आग्रह जैसे शब्द इस्तेमाल करने शुरू कर दिए। अमेरिका और कनाडा में राजद्रोह से जुड़े नियम हैं, लेकिन वहां भी फ्री स्पीच पर कोई पाबंदी नहीं है। वहीं दो पत्रकारों द्वारा पेश की गई मूल याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता कोविन गोंजाल्वेज ने पक्ष रखा। इस याचिका में कहा गया है कि हो सकता है कि 1962 में धारा 124ए को संवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट सही रही हो। लेकिन हालिया समय में अब यह धारा गैरलोकतांत्रिक और गैरजरूरी हो चुकी है। 

Deepak Mishra

लेखक के बारे में

Deepak Mishra
दीपक मिश्र मीडिया इंडस्ट्री में करीब 17 साल का अनुभव रखते हैं। खेल, सिनेमा और राजनीति पर प्रमुखता से काम किया है। खासतौर पर खेल की खबरों से जुनून की हद तक मोहब्बत है। 2011 में क्रिकेट वर्ल्ड कप और 2014 में फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप प्रमुखता से कवर कर चुके हैं। फोटोग्राफी और मोबाइल वीडियो स्टोरी के साथ-साथ पॉडकास्ट में विशेष रुचि रखते हैं। दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट के साथ काम करते हुए कई वीडियो स्टोरीज पर काम किया। इसी दौरान आईपीएल पर पॉडकास्ट के साथ एक अन्य पॉडकास्ट ‘शहर का किस्सा’ भी कर चुके हैं। पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद आज अखबार के साथ पत्रकारिता की शुरुआत हुई। इसके बाद दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट और पत्रिका अखबार में काम किया है। आई नेक्स्ट की डिजिटल विंग में काम करते हुए कई नए और रोचक प्रयोग किए। लाइव हिन्दुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर रहे हैं। और पढ़ें
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