बंदी प्रत्यक्षीकरण संबंधी कानूनी प्रश्न पर विचार करेगा कोर्ट

Newswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
Follow us on Google News
share

सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय लिया है कि क्या बार-बार गिरफ्तारी की वजह से हिरासत में रखे जाने को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनवाई योग्य है। यह मामला मध्य प्रदेश के गैंगस्टर हाजी अब्दुल रज्जाक की याचिका से संबंधित है, जो आरोप लगाते हैं कि उन्हें गिरफ्तारी के लिखित आधार नहीं दिए गए थे।

बंदी प्रत्यक्षीकरण संबंधी कानूनी प्रश्न पर विचार करेगा कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट इस कानूनी प्रश्न पर विचार करने के लिए सहमत हो गया कि क्या बार-बार गिरफ्तारी के कारण किसी आरोपी को लगातार हिरासत में रखे जाने को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनवाई योग्य है। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार को एक गैंगस्टर की याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता गैंगस्टर अगस्त-2021 से हिरासत में है, जबकि उसे गिरफ्तारी के लिखित आधार नहीं दिए गए थे। शीर्ष अदालत हाजी अब्दुल रज्जाक की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उसने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा उसकी ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण’ याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी है।

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि उसकी हिरासत को गैर-कानूनी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वह उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों में हिरासत में हैं। हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने शीर्ष अदालत में दलील दी कि गिरफ्तारी के आधार याचिकाकर्ता को लिखित रूप में नहीं दिए गए थे। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने इस बात पर सवाल उठाया कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किये जाने का फैसला उचित है।

कृपया अपने अनुभव को रेट करें

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें