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23 फरवरी, 2020|12:42|IST

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संसद से बोला सुप्रीम कोर्ट- विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेने की स्पीकर की शक्तियों पर पुनर्विचार विचार करें

a view of the supreme court of india  sanchit khanna ht photo

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संसद से कहा कि वह विधायकों की अयोग्यता की मांग करने वाली याचिकाओं पर फैसला लेने संबंधी अध्यक्ष की शक्तियों के बारे में पुन: विचार करे क्योंकि अध्यक्ष स्वयं किसी राजनीतिक दल से आते हैं। दरअसल, उच्चतम न्यायालय ने मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष से कहा कि वह मणिपुर के वन मंत्री एवं भाजपा विधायक टी. श्यामकुमार को अयोग्य ठहराने की मांग करने वाली कांग्रेस नेता की याचिका पर चार हफ्ते में फैसला लें।

इसी दौरान शीर्ष अदालत ने अयोग्य ठहराने की मांग करने वाली याचिकाओं को देखने के लिए एक स्वतंत्र प्रणाली बनाने का सुझाव दिया।

न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कांग्रेस विधायक फाजुर रहीम और के. मेघचंद्र से कहा कि यदि विधानसभा अध्यक्ष भाजपा के मंत्री की अयोग्यता की मांग करने वाली याचिका पर चार हफ्ते के भीतर फैसला नहीं ले पाते हैं तो वह फिर से शीर्ष न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

भाजपा के मंत्री ने विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर जीता था लेकिन बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए और मंत्री बन गए। न्यायालय ने कहा कि संसद को इस पर पुन: विचार करना चाहिए कि अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर फैसला अध्यक्ष द्वारा लिया जाना चाहिए अथवा नहीं। न्यायालय ने विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों पर पुन: विचार का सुझाव देते हुए कहा कि यह ध्यान रखना आवश्यक है कि अध्यक्ष स्वयं किसी राजनीतिक दल से आते हैं।
    

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  • Web Title:Supreme Court tells Parliament Rethink Speaker powers to disqualify in verdict on Manipur