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एमएस धोनी से जुड़े केस में पूर्व IPS को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर लगाई रोक; क्या था मामला

मद्रास हाईकोर्ट ने 'मैच फिक्सिंग' के एक कथित मामले में जांच से संबंधित कुछ सामग्री के प्रकाशन के बाद धोनी द्वारा दायर सिविल मुकदमे और अवमानना ​​​​याचिका पर अपना आदेश पारित किया था।

एमएस धोनी से जुड़े केस में पूर्व IPS को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर लगाई रोक; क्या था मामला
Nisarg Dixitएजेंसी,नई दिल्लीTue, 06 Feb 2024 08:58 AM
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उच्चतम न्यायालय ने न्यायालय की अवमानना के एक मामले में सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी जी. संपत कुमार को बड़ी राहत दी है। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की याचिका पर मद्रास उच्च न्यायालय की ओर से सुनाई गई 15 दिन की कैद की सजा पर सोमवार को रोक लगा दी।

न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने पूर्व आईपीएस अधिकारी कुमार की याचिका पर उनकी सजा पर अंतरिम रोक का आदेश पारित किया। पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले की वैधता को चुनौती देने और अंतरिम राहत की गुहार वाली कुमार की याचिका पर धोनी को नोटिस जारी किया।

मद्रास उच्च न्यायालय ने 'मैच फिक्सिंग' के एक कथित मामले में जांच से संबंधित कुछ सामग्री के प्रकाशन के बाद धोनी द्वारा दायर सिविल मुकदमे और अवमानना ​​​​याचिका पर अपना आदेश पारित किया था। न्यायालय ने दिसंबर 2023 में धोनी द्वारा दायर अवमानना ​​याचिका पर सेवानिवृत्त आईपीएस कुमार को 15 दिन के कारावास की सजा सुनाई थी।

न्यायालय ने अपने इस फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए पूर्व पुलिस अधिकारी को 30 दिन का समय दिया और तब तक सजा स्थगित कर दी थी। धोनी ने शुरू में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) सट्टेबाजी मामले में उनके खिलाफ मैच फिक्सिंग के आरोप लगाने पर 2014 में तमिलनाडु पुलिस के सीआईडी ​​विभाग के पुलिस अधिकारी कुमार और एक टेलीविजन चैनल के खिलाफ 100 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

धोनी ने बाद में पुलिस अधिकारी के खिलाफ अवमानना ​​याचिका दायर की थी, जिसमें दावा किया गया कि पुलिस अधिकारी कुमार द्वारा शीर्ष अदालत और मद्रास उच्च न्यायालय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की गई थी। कुमार ने 2013 में आईपीएल सट्टेबाजी मामले में प्रारंभिक जांच की और बाद में उन्हें इस मामले की जांच से हटा दिया गया था। उन्हें रिश्वत के आरोपों के बाद निलंबित कर दिया गया था।

निचली अदालत ने 2019 में ठोस सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए कुमार को आरोपों से बरी कर दिया था। अदालत के समक्ष कुमार ने दावा किया था कि मैच फिक्सिंग घोटाले का पर्दाफाश करने के कारण उन्हें फंसाया गया था।

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