उम्मीदवारों के आपराधिक केसों का ब्योरा नहीं किया सार्वजनिक, SC ने बीजेपी, कांग्रेस समेत 8 दलों पर ठोंका जुर्माना

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में देश की कई राजनीतिक पार्टियों पर जुर्माना लगाया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और , सीपीआई, एनसीपी समेत कुल 8 दलों पर यह जुर्माना...

उम्मीदवारों के आपराधिक केसों का ब्योरा नहीं किया सार्वजनिक, SC ने बीजेपी, कांग्रेस समेत 8 दलों पर ठोंका जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में देश की कई राजनीतिक पार्टियों पर जुर्माना लगाया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और , सीपीआई, एनसीपी समेत कुल 8 दलों पर यह जुर्माना लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में बीजेपी और कांग्रेस पर 1 लाख रुपया जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और सीपीएम पर 5 लाख रुपया का जुर्माना लगाया है। दरअसल बिहार चुनाव के दौरान अपने प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड मीडिया में प्रकाशित न करने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने 8 पार्टियों को अपने आदेश का पालन न करने के लिए अवमानना का दोषी माना है। जिसके बाद अदालत ने जेडीयू, आरजेडी, एलजेपी, कांग्रेस, बीजेपी, सीपीआई पर 1-1 लाख का जुर्माना किया है। इसके अलावा, सीपीएम और NCP पर 5-5 लाख का जुर्माना लगाया है।

शीर्ष अदालत ने अपने अहम निर्देश में कहा है कि सभी राजनीतिक दल अपनी वेबसाइट पर प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी डालें। अदालत ने चुनाव आयोग से भी कहा है कि वो ऐप बनाएं, जहां मतदाता ऐसी जानकारियां देख सकें। अदालत ने इसके साथ ही यह भी कहा है कि पार्टी प्रत्याशी चुनने के 48 घंटे के भीतर आपराधिक रिकॉर्ड मीडिया में प्रकाशित करें। आदेश का पालन न होने पर आयोग सुप्रीम कोर्ट को सूचित करने का आदेश भी दिया गया है। 

इधर उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को अपने एक और अहम आदेश में कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत आरोपी कानून निर्माताओं के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामलों को लोक अभियोजक, उच्च न्यायालयों की अनुमति के बिना वापस नहीं ले सकते। प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने यह भी कहा कि वह नेताओं के विरुद्ध दर्ज मामलों की निगरानी करने के लिए उच्चतम न्यायालय में एक विशेष पीठ की स्थापना पर भी विचार कर रही है। 

पीठ ने आदेश दिया कि सांसदों और विधायकों के विरुद्ध मामले की सुनवाई कर रहे विशेष अदालतों के न्यायाधीशों का अगले आदेश तक स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। उच्चतम न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरलों को निर्देश दिया कि वे कानून निर्माताओं के विरुद्ध उन मामलों की जानकारी, एक तय प्रारूप में सौंपें, जिनका निपटारा हो चुका है। 

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Nishant Nandan

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एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
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