श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट को प्राधिकार घोषित करने की मांग
सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की गई है जिसमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सार्वजनिक प्राधिकार घोषित करने और सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत लाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने राम मंदिर की संपत्तियों पर मालिकाना हक के संबंध में भी स्पष्टीकरण की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अर्जी दाखिल कर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सार्वजनिक प्राधिकार घोषित करने और इसे सूचना के अधिकार अधिनियम के दायरे में लाने की मांग की है। शीर्ष अदालत में दाखिल अर्जी में अयोध्या के राम मंदिर की संपत्तियों पर मालिकाना हक के बारे में भी स्पष्टीकरण जारी करने का आग्रह किया है। अधिवक्ता अनूप प्रकाश अवस्थी ने अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले में यह अर्जी दाखिल की है। इसमें उन्होंने 2019 में शीर्ष अदालत द्वारा 9 नवंबर 2019 को ‘एम. सिद्दीक (मृत) उनके कानूनी उत्तराधिकारियों के माध्यम से बनाम महंत सुरेश दास व अन्य’ मामले जो कि अयोध्या फैसले के नाम से जाने जाते हैं, में जारी निर्देशों के सही मकसद और अर्थ के बारे में स्पष्टीकरण की मांग की है। ये निर्देश श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन, स्वरूप और कानूनी दर्जे से संबंधित हैं।
सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट घोषित हो
शीर्ष अदालत में दाखिल अर्जी में यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि राम मंदिर निर्माण और प्रबंधन के लिए गठित किया गया श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पूरी तरह से एक ‘सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट’ है।
आरटीआई के दायरे में हो ट्रस्ट
याचिकाकर्ता से सुप्रीम कोर्ट से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 2(एच) के तहत एक सार्वजनिक प्राधिकार घोषित करने की मांग की ताकि इसके वित्तीय लेन-देन और प्रशासनिक निर्णयों में पूर्ण पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
संपत्ति पर भगवान का अधिकार
अर्जी में यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि राम मंदिर की सभी चल और अचल संपत्तियों का मालिकाना हक चाहे वे सरकार द्वारा दी गई हों या भक्तों द्वारा दान में दी गई है, उस पर मालिकाना हक भगवान श्री राम के पास है, न कि ‘मंदिर ट्रस्ट’ के पास।
निर्मोही अखाड़ा की भूमिका
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि ट्रस्ट में वर्तमान में निर्मोही अखाड़े का प्रतिनिधित्व 2019 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुरूप है या नहीं।
प्रशासनिक सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में ट्रस्ट के प्रशासनिक सुधार के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की है। इसमें सार्वजनिक प्रशासन, गवर्नेंस, वित्त, ऑडिटिंग, मंदिर प्रशासन, कानून, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और हिंदू धार्मिक मामलों के क्षेत्रों के प्रतिष्ठित लोग शामिल हों, ताकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मौजूदा गवर्नेंस और प्रशासनिक ढांचे की जांच की जा सके।


