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23 अक्तूबर, 2020|11:18|IST

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न्यूज चैनलों को नियंत्रित करने के लिए स्वतंत्र नियामक बनाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

supreme court

सुप्रीम कोर्ट ने देश में प्रसारण सेवाओं को नियंत्रित करने के लिए एक स्वतंत्र संस्था की स्थापना के लिए दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को केंद्र से जवाब मांगा। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्स के माध्यम से सुनवाई करते हुए इस जनहित याचिका पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय के साथ ही न्यूज ब्रॉडकाटर्स एसोसिएशन, न्यूज ब्रॉडकास्टिंग मानक प्राधिकरण और भारतीय प्रेस परिषद को भी नोटिस जारी किए। यह जनहित याचिका अधिवक्ता रीपक कसल ने दायर की है। 

याचिका में कहा गया है कि सनसनीखेज रिपोर्टिंग और संवेदनशील मुद्दों पर टीवी न्यूज चैनलों पर होने वाली चर्चा पर निगाह रखने के लिए देश में भारत का प्रसारण नियामक प्राधिकरण नाम से एक स्वतंत्र संस्था की स्थापना की जानी चाहिए।

याचिका में कहा गया है, ''याचिका संविधान में प्रदत्त गरिमा के साथ जीने के अधिकार की रक्षा और संरक्षा के लिए न्यायालय से हस्तक्षेप करने का अनुरोध करता है जिसके 'प्रेस' होने के दावे के साथ अनियंत्रित इलेक्ट्रानिक चैनलों ने हत्या कर दी है। याचिकाकर्ता ने अपने दावे के समर्थन में कुछ न्यूज चैनलों की रिपोर्टिंग का भी जिक्र किया है।

याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 19 (1) में प्रदत्त बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार किसी व्यक्ति, राजनीतिक दल या धार्मिक संगठन की गरिमा को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं देता है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 19(2) का जिक्र करते हुए कहा गया है कि बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार असीमित नहीं है और इस पर कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। याचिका के अनुसार अनुच्छेद 19 (2) किसी दूसरे व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला कोई बयान देने से दूसरे को रोकता है। 

याचिका में कहा गया है कि संविधान दूसरों को अपराध के लिए उकसाने वाले बयान देने से भी व्यक्ति को रोकता है। भारतीय कानून के तहत बोलने की आजादी किसी को, प्रेस को भी नहीं, अपने विचारों को खुलकर अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता नहीं देता है।

याचिका में कहा गया है कि कुछ इलेक्ट्रानिक चैनल समाचार चैनल होने का दावा करते हैं लेकिन वे देश के विभिन्न समुदायों के बीच नकारात्मकता और वैमनस्यता फैलाने में लगे रहते हैं। इसी तरह कुछ चैनलों ने एक समुदाय को निशाना बना रखा है और वे एक समुदाय को दूसरे के प्रति उकसाते हैं।

याचिका के अनुसार स्व:नियंत्रित प्रसारण चैनलों द्ववारा पत्रकारिता के नाम इस तरह की गैरकानूनी गतिविधियों के कारण ही भारत 2019 में विश्व प्रेस की आजादी के मामले में 180 देशों में से 138वें स्थान से गिरकर 140वें स्थान पर पहुंच गया है। याचिका में न्याय के प्रशासन में मीडिया का हस्तक्षेप रोकने और 'मीडिया ट्रायल रोकने के लिये निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।

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  • Web Title:supreme court seeks Centre reply on PIL for setting up body to regulate news broadcasters