DA Image
30 अक्तूबर, 2020|4:03|IST

अगली स्टोरी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हाथरस के कथित गैंगरेप केस को देखे इलाहाबाद हाईकोर्ट

supreme court

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि एक दलित युवती के साथ कथित गैंगरेप और बर्बरता के चलते हुई उसकी मौत को लेकर हाथरस केस की इलाहाबाद हाईकोर्ट को मॉनिटर करने की इजाजत दी जाती है। एक जनहित याचिका और वकीलों और कार्यकर्ताओं की तरफ से दायर कई याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत को यह कहा गया कि उत्तर प्रदेश में निष्पक्ष ट्रायल संभव नहीं है क्योंकि कथित तौर पर जांच को भटका दिया गया है।

मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस आशंका को खारिज करते हुए कहा, "उच्च न्यायालय को इससे निपटने देना चाहिए। यदि कोई समस्या है तो हम यहां हैं।" सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अलावा सुनवाई के दौरान हरीश साल्वे, इंदिरा जयसिंह और सिद्धार्थ लूथरा जैसे वकील कई पक्षों की तरफ से पेश हुए थे।

कोई वकील इसके विरोध में बहस नहीं करना चाहते थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा- "हमें पूरी दुनिया की सहायता की जरूरत नहीं है।" सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि किसी भी मामले में पीड़ित की पहचान का खुलासा नहीं किया जाता है और उसके परिवार के सदस्यों और गवाहों को पूरी सुरक्षा और सुरक्षा दी जाती है।

ये भी पढ़ें: जल्द खुलेंगी हाथरस कांड में साजिश की परतें,ED ने की आरोपियों से पूछताछ

पीड़ित परिवार की तरफ से पेश हुए वकील ने हाथरस केस को उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय राजधानी में ट्रांसफर किए जाने की मांग की। कार्यकर्ता और वकील इंदिरा जयसिंह ने राज्य में निष्पक्ष ट्रायल होने पर शंका जताते हुए गवाहों की सुरक्षा को लेकर दलीलें दी। शुरुआत में, सॉलिसिटर जनरल ने हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर हलफनामे का उल्लेख किया जिसमें मामले में पीड़ित परिवार और गवाहों को प्रदान की गई सुरक्षा और सुरक्षा के बारे में विवरण दिया गया था।

राज्य सरकार जिसने पहले ही केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया है और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच को सहमति दे दी है, उसने सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गवाहों की सुरक्षा और पीड़ित के परिवार को वकील दिए जाने के बारे में मांगे गए ब्यौरे पर हलफनामा दायर किया था। अनुपालन हलफनामे का उल्लेख करते हुए तुषार मेहता ने कहा कि पीड़ित के परिवार ने सूचित किया है कि उन्होंने वकील रख ली है और उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि सरकारी वकील को भी उनकी तरफ से इस मामले को देखना चाहिए।

हाथरस के एक गांव में 14 सितंबर को 19 वर्षीय दलित लड़की से चार लड़कों ने कथित रूप से बलात्कार किया था। इस लड़की की 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। पीड़िता की 30 सितंबर को रात के अंधेरे में उसके घर के पास ही अंत्येष्टि कर दी गई थी। उसके परिवार का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने जल्द से जल्द उसका अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर किया। स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिवार की इच्छा के मुताबिक ही अंतिम संस्कार किया गया।

ये भी पढ़ें: हाथरस: UP सरकार का SC में जवाब, पीड़ित परिवार को दी तीन स्तरीय सुरक्षा

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Supreme Court says let Allahabad High Court to look into the alleged gangrape case of Hathras