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हिंदी न्यूज़ देश'जजों की संख्या दोगुनी करना समस्या का हल नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी जनहित याचिका

'जजों की संख्या दोगुनी करना समस्या का हल नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी जनहित याचिका

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका फाइल करते हुए अश्विनी उपाध्याय ने जजों की संख्या बढ़ाने की मांग रखी थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा यह समाधान नहीं हो सकता।

'जजों की संख्या दोगुनी करना समस्या का हल नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी जनहित याचिका
Ankit Ojhaएजेंसियां,नई दिल्लीTue, 29 Nov 2022 09:24 PM

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देश के हाई कोर्ट और निचली अदालतों में जजों की संख्या दोगुनी करने की एक याचिका पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। यह याचिका भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने फाइल की थी। मामले की सुनवाई सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा कर रहे थे। सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि जजों की संख्या दोगुनी करने जैसे सरल समाधान से कोई हल निकलने वाला नहीं है। इससे पेंडिंग पड़े केसों के समाधान में कोई सफलता नहीं मिलने वाली है। 

कोर्ट ने कहा, ये सारे उपाय लोकलुभावन हैं। हाल यह है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में 160 वैकेंसी नहीं भर पा रही हैं और बात की जा रही है 320 की। बॉम्बे हाई कोर्ट की बात करें तो वहां बुनियादी ढांचा ही नहीं है। ऐसे में जजों की संख्या बढ़ाकर क्या होगा। अभी जितनी वैकेंसी हैं उनको भरने में ही कितनी कठिनाई है यह बात देखनी जरूरी है। 

कोर्ट ने कहा, जजों की कमियों को दूर करना कोई समाधान नहीं है। इस तरह की साधारण जनहित याचिकों पर सुनवाई करने का कोई औचित्य नहीं है। सीजेआई चंद्रचूड़ ने यहां तक कहा कि ऐसी याचिकाओं से अदालत का समय  जाया होता है और इसके लिए जुर्माना भी लगाया जा सकता है। वहीं वकील उपाध्याय ने अपना तर्क रखते हुए कहा कि देश में बहुत सारे लोग अदालतों में पेंडिंग केसों की वजह से परेशान हैं। 

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि केवल जजों की संखाया बढ़ाना लंबित मामलों का समाधान ढूंढना नहीं है। याचिका को खारिज कर दिया गया लेकिन भर्ती और रिक्तियों से संबंधित रिसर्च के साथ नई याचिका फाइल करने की छूट है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, जब मैं इलाहाबाद हाई कोर्ट में था तब कानून मंत्री ने 25 फीसदी जजों की संख्या बढ़ाने को कहा था लेकिन मेरे लिए 160 पद भरने ही मुश्किल हो गए।