सेंट्रल मार्केट : 44 सील भवनों के अवैध निर्माण होंगे ध्वस्त, ईडब्लूएस और एलआईजी को भी राहत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल मार्केट मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए ईडब्लूएस और एलआईजी श्रेणी के 459 मकानों को राहत देने से मना किया। अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश देते हुए, कोर्ट ने परिषद को कार्रवाई करने के लिए नोटिस जारी किया। अगली सुनवाई से पहले अवैध निर्माणों की पहचान और रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया।

सेंट्रल मार्केट मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख मंगलवार को भी बरकरार रहा। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की कोर्ट ने मंगलवार को इस मामले में सुनवाई करते हुए ईडब्लूएस और एलआईजी श्रेणी के 459 मकानों को भी सेटबैक में कोई राहत नहीं दी और सील किए गए 44 भवनों के अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर उन्हें मूल स्वरूप में लाने के आदेश दिए हैं। परिषद द्वारा कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं कराए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रमुख सचिव आवास पी गुरुप्रसाद को भी कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने शहर के बाकी सभी आवासीय भवनों में अवैध निर्माण की पहचान करके उनकी भी सर्वे रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने भवन स्वामियों को स्वयं अवैध निर्माण ध्वस्त करने के लिए 15 दिन का नोटिस देने और इसके बाद परिषद को अवैध निर्माण ध्वस्त करके उसका पूरा खर्चा वसूल करने को कहा है। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि अवैध निर्माण है तो हटेंगे। सेटबैक पर किए गए अवैध निर्माणों को हटाकर भवन खाली करने होंगे। कोर्ट ने कहा कि जो भी अनधिकृत हैं, उसे कंपाउंड नहीं किया जा सकता, उसे हटाना ही होगा। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्लूएस) के मकानों को भी केवल इस आधार पर कोई विशेष राहत नहीं दी जाएगी। परिषद ने अदालत से आग्रह किया कि ईडब्लूएस मकानों में छोटे निर्माण को 1982 के नियमों के तहत कंपाउंड करने की अनुमति दी जाए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई निर्माण मास्टर प्लान और स्वीकृत नक्शे के अनुरूप नहीं है तो उसके कंपाउंडिंग का सवाल ही नहीं उठता। अदालत ने दो टूक कहा कि अवैध निर्माण को किसी भी परिस्थिति में वैध नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने नगर बायलॉज और स्थानीय नियमों का हवाला देकर मांगी जा रही राहत को भी सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि बायलॉज का सहारा लेकर लोगों की जान से समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके लिए मानव जीवन और सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि है। अदालत ने आवास विकास परिषद से पूछा कि कार्रवाई केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित क्यों है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि पूरे शहर में जहां-जहां अवैध निर्माण हैं, उनकी पहचान कर समान रूप से कार्रवाई की जाए और मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर से पहले सर्वे और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की जाए.
ईडब्लूएस से कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं मिल जाता
परिषद की तरफ से ईडब्लूएस मकानों के लिए की गई गुहार पर कोर्ट ने कहा कि ईडब्लूएस होने का अर्थ यह नहीं कि कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार मिल जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह व्यक्तिगत मामलों में नहीं जाएगी और किसी श्रेणी के लिए अलग नियम नहीं बनाएगी।
आवासीय क्षेत्र में नहीं चलेंगे स्कूल, अस्पताल, डायग्नोस्टिक सेंटर और बैंक
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सख्ती के साथ कहा कि आवासीय क्षेत्रों में स्कूल, अस्पताल, डायग्नोस्टिक सेंटर, बैंक या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां नियमों के विरुद्ध हैं। यदि कोई व्यवसाय करना चाहता है तो उसे वैध व्यावसायिक परिसर में किया जाए, न कि आवासीय भवन में। कोर्ट ने आवासीय भवनों में चल रहे स्कूलों पर भी कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा नहीं किया जा सकता। यदि स्कूल चलाना है तो उसे वैध संस्थागत परिसर में संचालित किया जाए और संबंधित व्यक्ति अदालत व प्रशासन के साथ सहयोग करें।
कोर्ट ने पूछा सीएमओ का नाम, कहा- तलब किया जाएगा
डायग्नोस्टिक सेंटर पर अदालत ने सख्त टिप्पणी की है। इस मामले में जब एक अधिवक्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल के पास मुख्य चिकित्सा अधिकारी का प्रमाणपत्र है और वह अस्पताल नहीं बल्कि डायग्नोस्टिक सेंटर चला रहे हैं तो सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित सीएमओ का नाम पूछा और कहा कि उन्हें तलब किया जाएगा। कोर्ट ने सवाल उठाया कि डायग्नोस्टिक सेंटर चलाने की अनुमति देने का अधिकार किसने दिया? पूछा कि क्या डायग्नोस्टिक सेंटर व्यावसायिक गतिविधि नहीं माना जाएगा। अदालत ने पूरे मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि एक शहर की स्थिति इतनी खराब है तो राज्य के अन्य हिस्सों का क्या हाल होगा.
आग की घटनाओं का भी किया उल्लेख
सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ और मालवीय नगर दिल्ली जैसी आग की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अवैध निर्माण और संकरी जगहों पर किए गए अतिक्रमण लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं, इसलिए ऐसे मामलों में किसी प्रकार की नरमी उचित नहीं होगी.
कोर्ट के आदेश के मुख्य बिंदू
- यदि पूरा भवन व्यावसायिक उपयोग में बदल चुका है तो पूरे भवन को ध्वस्त किया जाएगा।
- यदि केवल अतिरिक्त हिस्सा अवैध है तो 15 दिन का नोटिस दिया जाएगा।
- मालिक स्वयं अवैध निर्माण हटाएं, अन्यथा प्राधिकरण ध्वस्तीकरण करेगा।
- ध्वस्तीकरण का पूरा खर्च भवन स्वामी से भू-राजस्व की तरह वसूला जाएगा।
- सेटबैक पर किए गए अवैध निर्माण हटाकर सेटबैक छोड़ना होगा.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
- पूरे शहर में व्यापक निरीक्षण किया जाए।
- सभी अवैध निर्माणों की पहचान कर कार्रवाई जारी रखी जाए।
- सेटबैक में हुए सभी अतिक्रमण हटाए जाएं।
- अगली सुनवाई तक नई प्रगति रिपोर्ट अदालत में दाखिल की जाए.
कब क्या हुआ
- आवासीय भूखंड संख्या 661/6 वीर सिंह को 30 अगस्त 1986 में आवंटित हुआ था
- संपूर्ण भुगतान के बाद 6 अक्टूबर 2004 में भूखंड की रजिस्ट्री कराई थी
- 1990 में वीर सिंह ने भूखंड के फ्रंट पर दुकानें बना लीं और पीछे मकान तो आवास विकास ने 19 सितंबर 1990 को नोटिस दिया
- 31 मई 2011 में आवास विकास ने उक्त भूखंड का कब्जा छोड़ने का नोटिस दिया
- 22 अगस्त 2013 को आवास आयुक्त ने इस भूखंड का आवंटन निरस्त कर दिया
- आवास विकास ने अवैध निर्माण रोकने के लिए 30 जुलाई 2013 को थाना नौचंदी को पत्र भेजा
- 2013 में परिषद ने भूखंड पर अवैध निर्माण के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दायर की
- 5 दिसंबर 2014 को हाईकोर्ट ने 661/6 पर हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश दिए
- व्यापारी राजेंद्र बड़जात्या व अन्य सुप्रीम कोर्ट चले गए और वहां से स्टे मिल गया
- 21 नवंबर 2024 को आदेश सुरक्षित रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने परिषद से 499 भवनों पर भी अवैध निर्माण होने की सर्वे रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए
- परिषद ने एक सप्ताह तक शास्त्रीनगर योजना-3 व 7 में सर्वे करके रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की
- 17 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश दिए
- अगस्त 2025 को आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की
- 6 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने शासन, जिला प्रशासन, पुलिस, परिषद और व्यापारियों से 27 अक्तूबर तक जवाब मांगा
- 25 अक्टूबर 2025 को परिषद ने पुलिस बल के साथ 661/6 कॉम्पलेक्स पर बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की
- 27 जनवरी 2026 को कोर्ट ने कॉम्पलेक्स संख्या 661/6 के अतिरिक्त बाकी बचे सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के आदेश दिए
- 1 अप्रैल 2026 को कोर्ट ने आदेश का अनुपालन नहीं कराए जाने पर प्रमुख सचिव आवास पी गुरु प्रसाद को कोर्ट में तलब किया
- 2 अप्रैल 2026 को कोर्ट ने आधी अधूरी रिपोर्ट पर परिषद को कड़ी फटकार लगाई, विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगते हुए पूर्व मंडलायुक्त ह्रषिकेश भास्कर यशोद को कोर्ट में तलब किया
- 4 अप्रैल 2026 को कोर्ट ने पूरी तरह से कॉमर्शियल गतिविधियों के रूप में संचालित 44 भवनों को 24 घंटे के अंदर सील करने के आदेश दिए।
- 9 अप्रैल 2026 को कोर्ट ने 815 भवनों में सेटबैक कब्जाकर किए गए अवैध निर्माणों को 2 माह में हटाने और भू उपयोग परिवर्तन की विस्तृत पॉलिसी उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए 14 जुलाई की तिथि सुनवाई के मुकर्रर की
- 14 जुलाई 2026 को कोर्ट ने सील किए गए 44 भवनों के अवैध निर्माण को ध्वस्त करने और शहर के बाकी आवासीय भवनों का सर्वे करके रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। ईडब्लूएस मकानों को भी सेटबैक से राहत देने से इंकार।


